Japan को विश्व में सबसे लंबी जीवन प्रत्याशा वाले देशों में गिना जाता है। यहां का ओकिनावा द्वीप दुनिया के पांच Blue Zone में से एक है। Japanese अन्य देशों की तुलना में लंबी और स्वस्थ जिंदगी जीते हैं, Japanese Longevity हमेशा USA, UK जैसे विकसित देशों के लिए एक शोध का विषय रही है।
जापानियों के दीर्घायु होने के पीछे क्या कारण हैं? क्या यह उनकी जीवन शैली, आहार, कार्यशैली और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक मानसिकता का परिणाम है? चलिए Japanese लोगों की लंबी उम्र और स्वस्थ जीवनशैली के रहस्यों से पर्दा उठाते हैं। इस लेख के माध्यम से हम जापानियों के स्वास्थ्य रहस्यों का गहन अध्ययन और विश्लेषण करेंगे और जानेंगे कि क्या ये रहस्य और युक्तियां आपके और हमारे लिए भी कारगर साबित हो सकती हैं?
List of Contents
जापानी दीर्घायु से संबंधित आंकड़े
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार जनसंख्या आयु वितरण प्रतिशत के हिसाब से जापान में 24.2% पोपुलेशन 65 साल से उपर की उम्र की हैं। यहां पुरुषों की औसत उम्र 81.25 साल और महिलाओं की औसत उम्र 87.32 साल है। यहां हर 1450 लोगों में से एक 100 साल की उम्र पार कर चुका है। यहां शतायु लोगों की गणना 1963 में शुरू हुई थी, तब यह संख्या केवल 153 थी, जो अब 92,139 की संख्या को भी पार कर चुकी है।

WHO के आंकड़ों के अनुसार यहां लोगों की जन्म समय जीवन प्रत्याशा 2021 के अनुसार 84.5 वर्ष हो गई है, जिसमें पिछले 21 सालों में 3.34 वर्षों की बढ़ोतरी हुई है, जो कि सन् 2000 में 81.10 वर्ष थी। सन 2021 में पूर्ण स्वस्थ जीवन प्रत्याशा पुरुष 71.9 वर्ष और महिला 74.8 वर्ष थी, जोकि 2019 करोना काल में थोड़ी गिरी थी। उस समय यह बढ़कर, महिलाओं की 75.5 वर्ष और पुरुषों की 72.6 हो गयी थी।
(पूर्ण स्वस्थ जीवन प्रत्याशा से मतलब उस उम्र से है जिसमें मनुष्य जन्म से लेकर पूर्ण स्वस्थ रहने तक एक उम्र गुजारता है) कुल मिलाकर जापानी लोगों की औसत स्वस्थ जीवन प्रत्याशा 73.4 है जिसमें सन 2000 से 2021 तक 1.82 वर्ष की बढ़ोतरी हुई है, हालांकि करोना काल में यह बढ़कर 74.1 वर्ष हो गई थी।
जापान के स्वास्थ्य, श्रम और कल्याण मंत्रालय ने 2023 के आंकड़ों के हिसाब से महिलाओं की जीवन प्रत्याशा 87.14 और पुरुषों की 81.09 कही है।
इसके अलावा ये भी सत्य है कि जापान में 100 साल से अधिक उम्र के लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। Nippon.com में दिये जनसंख्या आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2023 में 92,139 सेंटेनरियंस मौजूद थे। पिछले पच्चीस सालों से Centenarians की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।
100 साल पार करने वालो में सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं की है जोकि 88.5% है। प्रति 1 लाख जनसंख्या के अनुपात में 100 साल से अधिक उम्र के लोगों सबसे ज्यादा संख्या वाला प्रान्त शिमाने है, जहाँ उच्चतम अनुपात 155.2 है, इसके बाद चार मुख्य प्रांत कोच्चि 134.01, फिर टोटोरी 126.29, कागोशिमा 125.66, कुमामोटो 125.20 है जहां Centenarians सबसे ज्यादा है।
जापान की इतनी बड़ी जनसंख्या के दीर्घायु होने के पीछे सीधा सा संबंध उनकी स्वस्थ जीवनशैली और आहार योजना से जोड़कर देखा जाता है। इसके अलावा इतनी लंबी उम्र तक तक पहुंचने के पीछे ओर भी अनेक कारक और रहस्य मौजूद हैं। इन रहस्यों को जानकर और अपनाकर एक लम्बे जीवन की कामना की जा सकती है।
Japanese Longevity के रहस्य

परम्परागत आहार और सिद्धांत
जापानी लोगों ने अपनी खान-पान शैली को बहुत हद तक आज भी पारंपरिक रूप में अपनाया रखा है और इस आहार योजना में प्राकृतिक और ताजे खाद्य पदार्थों को महत्व दिया गया है। आहार योजना में मुख्य रूप से चावल, मछली, हरी सब्जियाँ, समुद्री शैवाल, सोया उत्पाद और स्थानीय फल शामिल होते हैं।
नुची गुसुई(भोजन को अपनी दवा बनाएं)
ओकिनावा रिसर्च सेंटर के शोध अनुसार, जापानी लोगों के पारंपरिक आहार में जो प्राकृतिक खाद्य पदार्थ, जड़ी-बूटियां और मसाले शामिल होते हैं वो ओषधिय गुण रखते हैं। इस पारंपरिक आहार में फाइटोन्यूट्रिएंट, कम कैलोरी, उच्च एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा होता है। ओकीनावा के लोगों ने अपने भोजन को नुची गुसुई अर्थात दवाई की तरह बना दिया है जो उनकी लंबी उम्र के लिए बहुत हद तक जिम्मेदार है।
हारा हची बु (Hara Hachi Bu)
ओकीनावा के वृद्ध लोगों में एक कहावत बेहद प्रचलित है कि ‘हारा हची बु’ मतलब (पेट को 80% भरो 20% खाली रखो)। वहां के बुजुर्गों में ये आम आदत है की खाते समय वो पेट भरकर नही खाते, बल्कि पेट को 20 % खाली रखते हैं। Hara Hachi Bu एक सिद्धांत है, जो खाने की मात्रा पर नियंत्रण करने में जापानियों की मदद करता है और उनको अधिक खाने से रोकता है। इस तरह से उनका मोटापा और उससे संबंधित बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। जापान में जहां सेंटेनरियंस की संख्या सबसे ज्यादा है, यह सिद्धांत उसी ओकिनावा द्वीप पर रहने वाले लोगों की जीवनशैली का अहम हिस्सा है।
स्तनधारियों में Hara Hachi Bu सिद्धांत के अनुसार खाना खाने से एक प्रकार की परिस्थिति बनती है, जिसमें लगातार ऊर्जा की कमी महसूस होती है, तो शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने के लिए वह ऊर्जा के सही उपयोग की कुशलता हासिल कर लेते हैं और अनुकूलित हो जाते हैं। आहार ग्रहण करने के ‘हारा हची बु’ तरीके से पता चलता है कि ओकीनावा के लोगों में खासकर जो आज बुजुर्ग है उनमें छोटे छोटे हिस्सों में खाना खाने की परम्परा चली आ रही है, जिसमें पेट हमेशा कुछ खाली रह जाता है।
मछली का सेवन
जापान की अधिकतम जनसंख्या का आहार मछलियों पर बहुत ज्यादा निर्भर है, जोकि ओमेगा-3 फैटी एसिड का बड़ा और एक महत्वपूर्ण स्रोत है। यह एक फैटी एसिड है जो हेल्दी हार्ट के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद है। यह एसिड दिल के रोगों के जोखिम को काफी कम कर देता है।
एक अध्ययन में यह पाया गया कि अमेरिकन की तुलना में जापानियों में कोरोनरी हृदय रोग की दर एक तिहाई से भी कम है। अमेरिका की तुलना में यह 60-70% कम है जबकि अमेरिका की तुलना में जापानी लोग अधिक मात्रा में धुम्रपान करते हैं। जापानीज में हृदय रोगों की कमी का कारण उनके आहार में मछली की अधिक मात्रा है, लगभग 180 ग्राम प्रतिदिन, जिसमें ओमेगा-3 बहुत अधिक मात्रा में होता है जो हृदय को सुरक्षित रखता है।
सोया उत्पादों का सेवन
जापानी आहार में सोया भी एक प्रमुख उत्पाद है। यहां लोग सोया उत्पादों का उपभोग अच्छी मात्रा में करते हैं। इन उत्पादों में टोफू प्रमुख हैं जिसका उपभोग अन्य सब्जियों के साथ जापान के लोग अक्सर करते हैं। इसमें काफी मात्रा में फाइटोएस्ट्रोजन होते हैं, जिनका प्रमुख कार्य शरीर में हार्मोन के संतुलन को बनाए रखना है। इसके अलावा फाइटोएस्ट्रोजन कुछ प्रकार के कैंसर जोखिम को भी बहुत हद तक कम करते हैं।
समुद्री शैवाल का सेवन
यह देश चारों तरफ से समुद्र से घिरा हुआ है इसलिए हजारों सालों से समुद्री शैवाल जापान में आम खाद्य पदार्थ है। यहां के प्रसिद्ध शिंटो धर्म के धार्मिक कार्यों और अनुष्ठानों में तो Seaweed का उपयोग प्रसाद और दवा के रूप में किया जाता है।
शैवाल कईं प्रकार के जरूरी खनिजों का प्रमुख स्रोत है। इसमें कैल्शियम,आयोडीन और मैग्नीशियम, आयरन जैसे खनिज अच्छी मात्रा में होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत और थायरॉयड को स्वस्थ रखते हैं। इसमें फाइबर भी अच्छी मात्रा में होता है जो मानव के पाचनतंत्र को दुरुस्त रखता है।
यहां अनेक प्रकार की Seaweeds पाई जाती है, जिनकी लगभग 1500 प्रजातियां हैं। इनमें से कुछ बहुत ज्यादा पसंद की जाती है जैसे- कोनबू, Wakame, हिजिकी, मोजुकु या इटोमोजुकु, नोरी, आओसा, आओनोरी, टेंगुसा, तोसाकानोरी इत्यादि (इन नामों को जापानीस भाषा से अनुवादित किया गया है) इन Seaweedsका उपयोग अपने प्रकार के व्यंजनों, सूप और सलाद के रूप मे आमतौर पर किया जाता है।
ग्रीन टी का सेवन
जापान के लोग डेली रूटीन में ग्रीन टी का खूब सेवन करते हैं, और ये शोधों से सिद्ध हो चुका है कि ग्रीन टी एंटीऑक्सीडेंट्स का समृद्ध स्रोत है। इस चाय में पाए जाने वाला कैटेचिन नामक पदार्थ एंटीऑक्सीडेंट्स के रूप में काम करता है और हृदय रोग, कैंसर के साथ कुछ पुरानी बीमारियों के जोखिम को भी कम करने में मदद करता हैं।
यहाँ ग्रीन टी का सेवन बड़ी मात्रा में किया जाता है। चाइना के बाद जापान दुसरे नंबर का सबसे ज्यादा ग्रीन टी कंज्यूम करने वाला देश है। यहां Green tea का नियमित रूप से सेवन किया जाता है, इसलिए जापानियों की लंबी उम्र की यह भी एक प्रमुख वजह है।
इस चाय के स्वास्थ्यवर्धक प्रभाव इसमें विशेष रूप से मौजूद पॉलीफेनॉल्स के कारण होते हैं। जानवरों पर किए गए कुछ अध्ययनों के माध्यम से पता चला है कि ग्रीन टी ब्लड शूगर, रक्तचाप व शारीरिक वजन को भी कम कर सकती है।
इकिगाई (जीवन में उद्देश्य)
OCS के एक अध्ययन में पाया की ओकिनावा के उत्तरी क्षेत्र के एक गांव ओगिमी में बाशो-फू बुनाई की एक प्राचीन शैली है जिसमें वहां रेशों की सफाई और धागों को घुमाने का काम वहां की बुजुर्ग औरतों का एक समुह करता है। इस प्रकार काम करने से वह ग्रुप सामाजिक तौर से एक दुसरे को आपस में जोड़े रखता है। इस प्रकार उनके पास हर दिन उठकर काम पर जाने और ग्रुप के सदस्यों से मिलने और समाज में अपना शारीरिक और आर्थिक सहयोग देने का उद्देश्य होता है, जो उनके अंदर जीने की चाहत को बरकरार रखता हुए है। इकिगाई का सिद्धांत भी Japanese Longevity के कारणों में शामिल है।
व्यायाम और अन्य शारीरिक गतिविधि
जापानी लोग डेली रूटीन के हिसाब से किसी ना किसी प्रकार की शारीरिक गतिविधियों से जुड़े होते हैं। पैदल चलना, दौड़ना, साइकिल चलाने, योग अभ्यास जैसे बहुत सारे व्यायामों और शारीरिक गतिविधियों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लेते हैं।
जापान के लोग नियमित रूप से 6 हजार से लेकर 7 हजार कदम डेली चलते हैं। Radio Taiso जापानियों में बड़ी फेमस फिजिकल एक्टिविटी है। इनके अलावा अन्य प्रकार की शारीरिक गतिविधियाँ और खेल भी जापान में बहुत लोकप्रिय हैं, जैसे टेबल टेनिस, Sumo wrestling, Golf, Baseball और Football इत्यादि। शारीरिक गतिविधि और एक्सरसाइज न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी सुधारती है।
अनुवांशिकी का परिणाम है दिर्घायु
OCS के शोध बताते हैं कि ओकिनावा के लोगों में दिर्घायु काफी हद तक अनुवांशिकी आधारित भी है। उनको रिसर्च में पता चला कि ओकिनावा के लोगों के जींस में सैंकड़ों सालों के कुछ अधिक परिवर्तन नही आए हैं। इसकी वजह है कि इन लोगों के आपसी संबंध बहुत गहरे हैं, इनके विवाहिक संबंध परम्परागत तरीके से ओकिनावा के अंदर ही जुड़े हैं। इन्हीं कारणों से जापान के अन्य भागों की तुलना में इनके जींस में न्यूनतम परिवर्तन हुए हैं।
धार्मिक और अध्यात्मिक परिवेश से गहरा जुड़ाव
जापान के लोग अपनी धार्मिक परम्पराओं के साथ गहराई से जुड़े होते हैं। अध्यात्मिक प्रवृति के साथ योग और ध्यान जापानियों की जीवनशैली का अहम हिस्सा हैं। ये लोग इन तकनीकों उपयोग अपने तनाव को कम करने, मानसिक शांति को बनाए रखने, और स्वास्थ्य में सुधार लाने में करते हैं।
ये लोग मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) स्वास्थ्य को बहुत महत्व देते हैं। तनाव को कम करने के लिए ध्यान और मेडिटेशन का बहुत सहारा लेते हैं। जापान ध्यान के लिए ज़ेन (Zen) का अभ्यास बहुत प्रचलित है, यह मन को शांत रखने और ध्यान को केंद्रित करने में बहुत मदद करता है।
ज़ेन और ध्यान (Zen and Meditation) बौद्ध धर्म की एक प्रमुख शाखा है, जो जापान के लोगों के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। ज़ेन ध्यान इन लोगों के लिए मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त करने का एक आसान साधन है, जो जापानियों की दीर्घायु और सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सामुदायिक जुड़ाव और सामाजिक संबंध
जापानी समाज में परिवार और समुदाय के बीच मजबूत आपसी संबंध बनाए रखना बहुत जरूरी और महत्वपूर्ण है। ये लोग नियमित रूप से अपने परिवार और दोस्तों के साथ कुछ समय जरूर बिताते हैं। इस तरह का सामाजिक व्यवहार उनको भावनात्मक व सामाजिक रूप से मजबूत बनाता है और अकेलेपन और डिप्रेशन से भी बचाता है।
ओकिनावा में रहने वाले बुजुर्गों को इस प्रकार की सामाजिक स्थिति का बहुत लाभ मिलता है। यहाँ की तंग गलियों और बस्तियों का डिजाइन सामाजिक जुड़ाव के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यहाँ रहने वाले बुजुर्गों ने दोस्ती और निरंतर मेलजोल से आपसी निर्भरता को बढ़ा लिया है। आपस में वस्तुओं का लेनदेन, सुचना को साझा करने, अपने कामों को साझा करने आदि प्रयत्नों से सामाजिक घनिष्ठता बढ़ा लिया है। इस वजह से यहाँ एक मजबूत सोशल नेटवर्क बनता है, जो यहाँ के बुजुर्गों को दिर्घायु का लाभ देता है।
मोआई
जापान में यह एक सांस्कृतिक सामाजिक समुह निर्माण की परम्परा है। मोआई समुह के सदस्य नियमित तौर पर मिलते हैं और एक दुसरे के साथ अपने अनुभव, सुख, दुख रूचियों को साझा करते हैं। हर प्रकार से एक दूसरे की भावनात्मक और वित्तीय सहायता करते हैं। इस प्रकार का सामाजिक व्यवहार बुजुर्गों और अन्य नागरिकों को शांति और भरोसा देता है की उनका समुदाय उनके साथ है।
इस प्रकार के सामाजिक नेटवर्क और सामुदायिक जुड़ाव जापान के लोगों की लम्बी जीवन यात्रा के लिए बहुत सहायक है। ओकिनावा के लोगों में इनही बेहतर सामाजिक परिस्थितियों के कारण रिटायरमेंट जैसे शब्द का कोई महत्व ही नही है।
अन्य देशों के साथ जापान की तुलना
जब भी जापानी लोगों की दीर्घायु की तुलना अन्य देशों से करते हैं, तो हमें स्पष्ट रूप से उनकी मानसिकता, जीवनशैली, खान-पान के तरीकों में अंतर नजर आता है। पश्चिमी देशों में ज्यादातर फास्ट फूड और असंतुलित भोजन का प्रचलित है, और वहीं इसकी तुलना में जापान के लोग परम्परागत और संतुलित खानपान को सर्वोपरि रखते हैं। 
अमेरिकन आहार की तुलना में जापानी भोजन
जापानी और अमेरिकन आहार के बीच अनेक ऐसे अंतर हैं जो जापान के आहार को बेहतर साबित करते हैं। जैसे जापानी लोगों का आहार अनेक प्रकार की वरायटी लिए हुए होता है वो अनेक किस्म के समुद्री खाद्य पदार्थों को शामिल करते हैं जिनमें मछली से लेकर कंई प्रकार की शैवाल मौजूद होती है, अन्न के तौर पर उबले हुए चावल और मल्टीग्रेन से बने खाने होते हैं, जबकि अमेरिका में लोगों का अधिकतर खाना एक ही खाद्य पदार्थ के चारों ओर घूमता है जैसे गेहूं और उससे बने अन्य खाद्य पदार्थ। अमेरिकन फास्ट फूड और जल्दी तैयार होने वाले भोजन को प्राथमिकता देते हैं।
जापानी आहार में पाचन को बेहतर बनाने वाले खाने शामिल करते हैं जबकि अमेरिकन अधिक वसा वाला मांस और प्रोटीनयुक्त आहार को महत्व देते हुए पाचनतंत्र पर भारी पड़ने वाले भोजन को प्राथमिकता देते हैं।
अमेरिकन आहार में सूखे खाने जैसे ब्रेड और अन्य बेक्ड पदार्थ अधिक होते हैं जिनमें प्राकृतिक रूप से पानी बहुत कम मात्रा में मौजूद होता है, जबकि जापान के अधिकतर खानों में प्राकृतिक रूप में भरपूर पानी मौजूद रहता है।
जापान के लोग खाते समय कम पानी का प्रयोग बहुत कम मात्रा में करते हैं जबकि अमेरिका में अधिकतर खाना ड्राई होने के कारण खाने के साथ अलग से अधिक पानी का उपभोग किया जाता है।
भारत की तुलना में जापानी आहार
भारतीय आहार भी अधिकतर वसा से भरपूर, डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ, लाल मीट और शुगर से भरपूर पेय और खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं, जिनहे खाकर भारतीय मोटापे, दिल के रोग, और डायबिटीज के जोखिम को बढ़ा रहे हैं। इसके दूसरी ओर जापानी आहार अधिकतर ताजा, प्राकृतिक और पौष्टिक होता है। इनका आहार ऐसे खाद्य पदार्थों पर आधारित होता है जो पाचनतंत्र के लिए कदापि भारी नही होता। जैसा की मैंने उपर बताया है कि ये खाने को दवाई कै जैसे उपयोग करते हैं, ऐसे खाना खाते हैं, जो शरीर में बीमारियों के जोखिम को बहुत हद तक कम करता है।
जापानी दीर्घायु के स्वास्थ्य रहस्यों को अपनाने के लाभ
जापानी आहार प्रणाली को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर हम अपने शरीर को जरूरी पोषक तत्व और एंटिओक्सिडेंटस प्राकृतिक रूप में दे सकते हैं, और अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। जापानी लोगों की तरह मछली, सोया, शैवाल और ताजा सब्जियों का सेवन करके दिल के रोगों, मोटापे, मधुमेह और कैंसर जैसी बिमारियों से बहुत हद तक बचा जा सकता है। मोटापे के खतरे को भी आसानी से कम किया जा सकता है।
- कम वसा और उच्च प्रोटीन वाले आहार से लाभ: जापानी आहार में अधिकांश ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं जिनमें कम से कम वसा और अधिकतम प्रोटीन मौजूद होता है। इनमें मछली, सोया उत्पाद और समुद्री शैवाल जैसे खाद्य पदार्थ प्रमुख होते हैं, इनमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है और वसा की मात्रा काफी कम होती है। इस प्रकार का खाद्य संतुलन हृदय स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
- हारा हाची बू सिद्धांत से लाभ ले सकते हैं: जापानियों के इस सिद्धांत को अपनाकर हम ओवर ईटिंग से बच सकते हैं, और अपने वजन पर भी नियंत्रण रख सकते हैं। इस सिद्धांत पर चलने से हमारा पाचन तंत्र भी स्वस्थ रहेगा और हम घंटों तक सक्रिय और ऊर्जावान बने रह सकते हैं।
- नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधि की आदत: उनकी रोजाना व्यायाम और शारीरिक गतिविधियों की नियमित आदत को अपनाकर फायदा ले सकते हैं। ये आदतें जैसे- हर दिन पैदल चलना, किसी न किसी खेल से जुड़े रहना इत्यादि हमारे शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त रहने से केवल शारीरिक लाभ ही नही मिलता बल्कि हमारा मानसिक स्वास्थ्य भी सुधारता है।
- योग और ध्यान को अपनाने से लाभ: जापानी ताई ची, जेन और योग, (Tai Chi, Zen and Yoga) जैसी गतिविधियाँ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है। इस प्रकार के योगाभ्यासों को अपनाकर फायदा लिया जा सकता है। Power of Silence व अन्य प्रकार की ध्यान विधियां और योगाभ्यासों को जीवन का हिस्सा बनाकर शरीर को स्वस्थ और दिमाग को मजबूत व तनाव मुक्त रखा जा सकता है। ये भी जापानी लोगों की दीर्घायु के पीछे के प्रमुख कारणों में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
- सामुदायिक सहभागिता का लाभ: जैसे जापानी लोग सामुदायिक कार्यक्रमों में भाग लेकर और अपने पड़ोसियों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखकर जीवन का आनंद लेते हैं उसी प्रकार हम भी मानसिक स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं और जीवन के महत्व को समझकर अधिक सार्थक जीवन जी सकते हैं।
निष्कर्ष
परम्परागत जीवनशैली, अनुवांशिकी, इकिगाई का सिद्धांत, नुची गुसुई, अनुकूल भौगोलिक परिवेश, संतुलित और पौष्टिक आहार, उनकी नियमित शारीरिक गतिविधियां, मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित ध्यान व योग,और सामाजिक घनिष्ठता व सहभागिता, और जापान सरकार द्वारा चलाए गए जन कल्याण कार्यक्रम, Japanese Longevity के प्रमुख रहस्य हैं।
आंकड़ों और अनुसंधानों के अध्ययन के परिणाम स्वरूप ज्ञात हुए इन रहस्यों में से कुछ को अपनाकर हम और आप भी अपने जीवन को स्वस्थ और दीर्घायु बना सकते हैं। इन उजागर रहस्यों का लाभ उठा सकते हैं, जैसे- संतुलित आहार से स्वस्थ जीवन, हारा हाची बू सिद्धांत से खाने की मात्रा पर नियंत्रण, नियमित व्यायाम से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य मे लाभ, जे़न और ध्यान से मानसिक शांति, सामाजिक घनिष्ठता और सहभागिता से परिवार और समुदाय के साथ मजबूत जुड़ाव।
अंत में मेरा मानना है कि Japanese Longevity के रहस्यों को समझकर, उन्हें अपनाकर, हम स्वस्थ लम्बा जीवन जी सकते हैं, बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम कर सकते हैं, बल्कि अपने जीवन को ओर अधिक सार्थक और खुशहाल बना सकते हैं।
अस्वीकरण: यहां केवल सामान्य जानकारी आप के साथ साझा की गयी है। किसी भी जानकारी का उपयोग करने से पहले उसे अन्य स्रोतों के द्वारा कन्फर्म कर लें। यहाँ उपलबध जानकारी के लिए हिन्दुविशेष.कॉम और लेखक पूर्ण सत्यता का दावा नहीं करता है।
स्रोत: WHO, nippon.com, https://orcls.org/ocs-part-2/, medium.com, nippon2
Read these articles also:
Power of Silence: मौन ध्यान से जीवन को बदलें
Astrology 5000 साल से भी पुराना विज्ञान: ज्योतिष शास्त्र और उसके उपयोग
ज्योतिष शास्त्र कैसे सीखे (Jyotish Shastra Kaise Sikhe): सम्पूर्ण जानकारी
Kanwar Yatra 2024: किसी एथलेटिक्स महोत्सव से कम नहीं है ये कांवड़ यात्रा
Waqf Board Amendment Bill 2024: जानिए सरकार वक्फ बोर्ड में संशोधन क्यों करने जा रही है
ज्योतिष का महत्व और उपयोग: जानिए Astrology Meaning
Pitru Paksha 2024: पितृपक्ष श्राद्ध विधि की संपूर्ण जानकारी
श्री कृष्णा Janmashtami 2024: लड्डू गोपाल Krishna की पूजा से मिलेगा मनचाहा फल
भारत में Sexual Violence का बढ़ता संकट: यौन हिंसा देश की एक गंभीर समस्या।









