Kaalsarp Dosh के कारक राहु और केतु के विषय में मेरी ये लाइनें हमेशा सटीक बैठती हैं कि- शुभ ग्रह के संग बैठे राहु केतु करें कमाल। इज्ज़त बढ़े धन संपत्ति से हो मालामाल।। जब आए सीध में, इक तरफ हों ग्रह सभी। कालसर्प दोष दुखदाई, उभरने ना दे कभी।।
क्या आपके बनते काम बिगड़ जाते हैं? क्या आप बार-बार बिमार पड़ते हैं? मन अशांत रहता है? कठिन परिश्रम के बावजूद भी रोजगार में सफलता प्राप्त नही हो रही है। इन परिस्थितियों में मेरा मानना है कि पीड़ित जातक को एक बार कुंडली जरूर दिखा लेनी चाहिए, कहीं Kaalsarp Dosh तो परेशान नही कर रहा है?
मैंने बहुत सारी कुंडलियों के अध्ययन में पाया कि जब भी यह दोष किसी जातक की कुंडली में बनता है तो उस जातक का जीवन अनेक विपत्तियों से घिरा रहता है, कंई बार उसकी उन्नति के मार्ग भी अवरुद्ध हो जाते हैं या बहुत अधिक परिश्रम के उपरांत भी उसको डिजर्विंग रिजल्ट प्राप्त नहीं होता है।
इस योग से पीड़ित व्यक्ति आर्थिक व शारीरिक रूप से परेशान तो होता ही है, साथ मे उसे मुख्य रूप से संतान संबंधी कष्ट भी होता है। या तो उसे संतान होती ही नहीं, या होती है, तो वह बहुत ही दुर्बल व रोगी होती है। उसको काम धंधे मे भी अधिकतर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कंई बार तो ऐसा होता है कि वह रोजी-रोटी का जुगाड़ भी बड़ी मुश्किल से कर पाता है। तरह-तरह के रोग भी उसे परेशान करते रहते हैं। समान्यतया Kaalsarp Dosh वाले जातक का जीवन संघर्षमय होकर बीतता है। चलिए अब समझते हैं कि क्या होता है यह दोष?
List of Contents
कालसर्प दोष क्या है?

जब किसी जातक की जन्म कुंडली के 12 भावों में उपस्थित ग्रहों में राहु एवं केतु 180 डिग्री पर किसी भाव में विच्छेदन करते हैं और बाकी के सभी 7 ग्रह इन दोनों यानि के राहु और केतु मध्य किसी एक साइड में आ जाते हैं, तो कालसर्प दोष का निर्माण होता है। उदाहरण स्वरुप मेरे एक क्लाइंट की कुंडली में मौजूद कालसर्प योग की इमेज यहां दी गई है।
जिस व्यक्ति की कुंडली की यह इमेज है, वो अक्सर बिमार रहते थे। मानसिक रूप से भी अस्वस्थ थे। आर्थिक स्थिति में अक्सर प्रोब्लमस देखने को मिलती थी। परन्तु भगवान सोमनाथ मंदिर में कालसर्प दोष निवारण पूजा के उपरांत अब उनकी स्थिति बहुत ठीक है। मेरे पास इस दोष से सम्बंधित बहुत सारी कुंडलियों का डेटा मौजूद हैं। व्यक्तिगत विषय होने के कारण यहां दिखाने की अनुमति नही है। चलिए विषय पर लोटते हैं।
कोई खगोलीय पिंड नही है राहु और केतु!

सबसे पहले राहु और केतु के विषय में यह जान लें कि भारतीय ज्योतिष में राहु और केतू को काल्पनिक छाया ग्रह रूप में माना गया है अर्थात किसी खगोलीय पिण्ड के रूप में इनका अस्तित्व नहीं है। वास्तव में जब चंद्रमा अपनी धुरी पर पृथ्वी की परिक्रमा के दौरान सूर्य के दीर्घवृत्तीय परिक्रमा पथ को उत्तर तथा दक्षिण में 180 डिग्री पर काटता है, तो वही कटान बिंदु राहु एवं केतु के रूप में जाने जाते हैं। इस प्रकार राहु और केतु केवल चंद्रमा द्वारा सूर्य के परिक्रमा मार्ग के दो काल्पनिक कटान बिंदु हैं।
कालसर्प योग एक मतभेद का विषय
कालसर्प योग की जानकारी को साझा करते हुए आपको यह बताना बहुत जरूरी है कि कालसर्प दोष भारतीय ज्योतिषाचार्यों में मतभेद का विषय भी है। ऐसा इसलिए है कि पुरातन भारतीय ज्योतिष की किसी भी विधि या ग्रंथों में जैसे कि जातक पारिजात, जैमिनी सूत्रम्, पराशर होरा, बृहत जातकम्, आदि ग्रंथों में कालसर्प दोष के विषय में उल्लेख नही मिलता है। यही कारण है कि ज्यातिषाचार्यों का एक वर्ग इसे नहीं मानता है।
वास्तव मे वैदिक ज्योतिष से भिन्न एक अन्य ज्योतिष पद्धति है- लाल किताब ज्योतिष पद्धति। यही वह नवीन ज्योतिष पद्धति है, जहां से कालसर्प दोष को लिया गया है, जो कि वर्तमान ज्योतिषीय चिंतन में बहुत प्रचलित है। बेसक, यह ज्योतिषाचार्यों में मतभेद का विषय है परन्तु वर्तमान में यह ज्योतिषियों का रोचक एवं चर्चित विषय है। इस लिए ज्योतिष शास्त्र में रूचि रखने वालों को इसके बारे जानना बहुत जरूरी है।
कालसर्प दोष के लक्षण और प्रभाव
कालसर्प दोष को ज्योतिष में एक विशेष स्थिति माना जाता है, जब किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु और केतु के बीच सभी ग्रह आ जाते हैं। इसे एक अशुभ योग माना जाता है, जो व्यक्ति के जीवन में कई तरह की परेशानियां ला सकता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
Kaal Sarp Dosh से प्रभावित व्यक्ति अक्सर कुछ विशेष लक्षणों को अनुभव करता है, जैसे कि-
- अचानक से बाधाओं का आना- बाधाओं का आना जिंदगी का एक हिस्सा है, परन्तु जब कुछ बाधाऐं अचानक से आती हैं जैसे कि वाहन दुर्घटना, अचानक से गिरकर चोटिल होना, अचानक से कारोबार में गिरावट या नौकरी का चले जाना, अचानक से गंभीर बिमारी का आना इत्यादि। संभव है कि Kaalsarp Dosh के लक्षण हों।
- लगातार बुरे सपनों का आना- सोते हुए सपनें देखना एक आम बात है, परन्तु कुछ सपने हमें आने वाली विपत्तियों के प्रति सचेत भी करते हैं। कुछ सपनों का बार बार लगातार दिखना Kaalsarp Dosh के लक्षण हो सकते हैं, जैसे कि, सांपों का सपनों में बार बार दिखना या एक जैसे भूतिया डरावने सपनों का अनेक बार आना इत्यादि।
- आत्मविश्वास की कमी- कंई बार देखा गया है कि इस दोष से ग्रस्त जातक का आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है। आत्मविश्वास में गिरावट के कारण व्यक्ति को हर कार्य में नाकामी का डर रहता है।
- स्वास्थ्य समस्याओं घिरे रहना- इस प्रकार के लक्षण में व्यक्ति बिना किसी स्पष्ट कारण के खुद को बिमार महसूस करता है। शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोरी महसूस करता है। कंई बार लगातार लंबे समय तक बिमारी की अवस्था बनी रहती है। पीड़ित व्यक्ति को अनिद्रा, बैचैनी, डिप्रेशन का अनुभव होता है।
- आर्थिक समस्या- किसी व्यक्ति के जीवन में भरसक प्रयास के बावजूद भी आर्थिक स्थिति सुधरने का नाम नही ले रही है तो यह कालसर्प योग का एक लक्षण हो सकता है।
- सामाजिक मान प्रतिष्ठा में कमी- अगर आपके अच्छे सामाजिक कार्यों के उपरांत भी समाज में आपका रुतबा नही बढ़ रहा है, तो संभव है कि आपकी कुंडली में कालसर्प योग मौजूद है।
- परिवार और विवाहिक जीवन में समस्याएं- शादी से पहले या शादी के बाद अगर वैवाहिक जीवन में समस्याएं उत्पन्न होती हैं। परिवार में लड़ाई झगडे़, मनमुटाव उत्पन्न होते हैं, तो एक बार परिवार को किसी ज्योतिषी से परामर्श करना चाहिए, हो सकता है कि Kaalsarp Yog परेशान कर रहा हो।
- व्यापार व रोजगार में समस्याएं- व्यापार में लगातार गिरावट का आना, कर्मचारियों का न टिकना। क्लाइंट का भाग जाना। मालिक को जरूर अपनी कुंडली जरूर चैक करवानी चाहिए। कहीं Kaalsarp Dosh तो परेशान नही कर रहा है।
- शिक्षा और कैरियर में समस्याएं- पढ़ाई में मन नही लगना, यादाश्त मे कमी, मनचाहे कैरियर का न मिलना। बार बार असफल होना। हो सकता है कि कुंडली में Kaalsarp Dosh हो या फिर कोई अन्य दोष, तो पंडित जी को एक बार कुंडली जरूर दिखाएं।
Kaal Sarp Yog के दो रूप
प्रभाव के हिसाब से इसे दो भागों में विभाजित किया गया है, पूर्ण Kaal Sarp Dosh व आंशिक Kaal Sarp Dosh। इसके अलावा ज्योतिष शास्त्र में 12 प्रकार के कालसर्प योग बताए गए हैं। जिनका वर्णन आगे किया गया है। पहले जानते हैं पूर्ण कालसर्प व आंशिक कालसर्प दोष के बारे में-
- पूर्ण कालसर्प: इस योग के लिए आवश्यक है कि राहु और केतु के मध्य आने वाले सभी ग्रहों की डिग्री पूर्ण रूप से दोनों ग्रहों के अंदर ही आनी चाहिए। जन्म कुंडली के 12 भावों में ग्रहों की ऐसी स्थिति को पूर्ण कालसर्प योग कहा जाता है।
- आंशिक कालसर्प: जब राहु और केतु 180 अंश पर आमने-सामने तो हैं परन्तु उनके भाव में स्थित किसी भी ग्रह की डिग्री राहु या केतु से बाहर जाती है तो उसे आंशिक कालसर्प दोष की श्रेणी में रखा जाता है। समझने के लिए चित्र को देखें। चलो अब समझते हैं कि Kaal Sarp योग कितने प्रकार के होते हैं?
Kaalsarp Dosh के 12 प्रकार
जातक की कुंडली में बनने वाले Kaal Sarp दोष बारह प्रकार के होते हैं, जो राहु-केतु के अलग-अलग भावों में उपस्थित होने और उनके मध्य शेष सात ग्रह सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि के आने पर यह दोष बनता है, परंतु केतु से राहु के मध्य आने वाले सभी ग्रहों से विपरीत काल सर्प दोष का निर्माण होता है, जो महान राजयोग का स्वरूप भी होता है।
कुंडली के लग्न चक्र में राहु-केतु की जिस प्रकार की स्थिति होती है उसी के अनुसार बारह प्रकार के Kaal Sarp दोष बताए गए हैं।
1. अनंत कालसर्प दोष
Anant Kaalsarp Dosha
जब भी किसी की कुंडली के पहले भाव में राहु, सातवें भाव में केतु हो, तो अनंत कालसर्प दोष बनता है। इस दोष से पीड़ित जातक को व्यापार में मित्र से धोखा मिल सकता है। माना जाता है कि इस प्रकार का दोष वैवाहिक जीवन में कड़वाहट पैदा करता है। स्त्री अथवा पुरुष के विवाह के अतिरिक्त प्रेम संबंधों को बढ़ावा देता है। इस स्थिति में तालाक की संभावना भी बनती रहती है।
2. कुलीक कालसर्प दोष
Kulik Kaalsarp Dosh
जब कुंडली के दूसरे भाव में राहु एवं आठवें घर में केतु तथा बाकी के सभी ग्रह इन दोनों के मध्य उपस्थित हों तो कुलीक कालसर्प दोष बनता है। इस दोष से पीडि़त व्यक्ति को किशोरावस्था में ही मादक पदार्थों के सेवन की लत लग जाती है। मद्यपान के कारण सड़क दुघर्टना भी संभावित है। इस दोष से पीड़ित व्यक्ति हमेशा बिना विचारे बोलता है। जातक के जीवन में मुंह अथवा गले की बीमारी की संभावना बनी रहती है।
3. वासुकी कालसर्प दोष
Vashuki Kaalsarp Dosh
जब कुंडली के तीसरे और नवें भाव में क्रमश: राहु-केतु उपस्थित हो और बाकी के सातों ग्रह इनके मध्य हों, तो ऐसी अवस्था मे यह दोष बनता है। इस दोष वाले जातक का धार्मिक कार्यों में विश्वास कम रहता है। भाई-बहनों से संबंधों में तनाव रहता है। वासुकी काल सर्प दोष वाला जातक पराक्रमी-परिश्रमी होने के बावजूद वांछित सम्मान प्राप्त नहीं कर पाता।
4. शंखफल कालसर्प दोष
Shankhpal Kaalsarp Dosh
जब राहु और केतु क्रमश: चौथे और दसवें घर में उपस्थित हों और शेष सातों ग्रह इनके मध्य में हों तो शंखफल कालसर्प दोष बनता है। माना जाता है कि इस दोष वाला जातक लड़कपन की अवस्था में ही चोरी तथा स्कूली पढ़ाई छोड़ देने जैसे कार्य करता है। लाल किताब के अनुसार समय रहते उपाय करने से जातक को शंखफल काल सर्प योग के दुष्प्रभावों से बचाया जा सकता है। इस दोष वाले जातक की माता को शारीरिक एवं मानसिक परेशानी रहने की प्रबल संभावना रहती है।
5. पद्म कालसर्प दोष
Padma Kaalsarp Dosh
जन्म कुण्डली में जब राहु-केतु क्रमश: पांचवें और ग्यारहवें भाव में हो तथा शेष सातों ग्रह इन दोनों के मध्य हों तो कुण्डली में पद्म कालसर्प दोष होता है। इस दोष के कारण प्रेम प्रसंग में धोखा खाने की संभावना होती है। कंई बार शादी के बाद संतान सुख में विलंब होता है। इस दोष के कारण संभावना बनती है कि जातक नीच कर्म द्वारा जीवन यापन करने का प्रयास करता है। ये भी संभावना बनती है कि इस दोष से ग्रसित जातक की शिक्षा किसी न किसी कारण से बाधित हो जाती है।
6. महापद्म कालसर्प दोष
Mahapadam Kaalsarp Dosh
कुंडली में राहु-केतु क्रमश: छठवें और द्वादश भाव में उपस्थित हों और शेष सातों ग्रह इनके मध्य में हों तो महापद्म Kaalsarp Dosh बनता है। इस दोष के कारण जातक के गंभीर बीमारी से पीडि़त होने की संभावना बनती है, इसी उसे कारण बार-बार अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस दोष से पीडि़त व्यक्ति जीवन भर जीवन यापन हेतु अपनी नौकरी या व्यवसाय में बदलावों को झेलता रहता है। सहकर्मियों से संबंध भी अच्छे नहीं बन पाते हैं।
7. तक्षक कालसर्प दोष
Takshak Kaalsarp Dosh
जब कुंडली में राहु-केतु क्रमश: सातवें एवं लग्न भाव में हों तथा शेष सातों ग्रह इनके मध्य में हों तो तक्षक कालसर्प दोष होता है। यह दोष जातक विवाह में विलंब का कारण बनता है। विवाह के उपरांत पति-पत्नि के अलगाव की संभावना बनी रहती है। इस दोष पीडि़त जातक की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण बार-बार बीमार पड़ जाता है। इस लिए ऐसे जातक को अपना विशेष ख्याल रखना पड़ता है।
8. कर्कोटक कालसर्प दोष
Karkotak Kaalsarp Dosh
कुंडली में जब राहु आठवें भाव में और केतु दूसरे भाव में बैठा हो और बाकी के सभी ग्रह इन दोनों के मध्य में हों तो यह कर्कोटक कालसर्प दोष कहलाता है। लाल किताब के अनुसार माना जाता है कि इस दोष से पीडि़त जातक की वाणी कठोर एवं कड़वाहट से भरी होती है। इसी अवगुण के प्रभाव से अक्सर जातक को खानदानी जमीन जायदाद से भी हाथ धोना पड़ता है। दाम्पत्य जीवन में शारीरिक संबंधों में व्यवधान उत्पन्न होता है। मानसिक हलचल के कारण आकाल मृत्यु और आत्महत्या जैसे विचारों की प्रबलता बनी रहती है।
9. शंखनाद कालसर्प दोष
Shankhnaad Kaalsarp yog
कुंडली में जब राहु नवम भाव में और केतु तीसरे भाव में स्थिति हों तो शंखनाद कालसर्प दोष बनता है। पितृ दोष का भी निर्माण यही कालसर्प दोष करता है। पिता के ऊपर सर्वाधिक दोष होता है। जीवन काल में भी सर्वाधिक अत्यधिक मेहनत करनी पड़ती है। इस दोष का उपाय जातक के जन्म के पश्चात जल्द से जल्द करें अन्यथा परिवार को अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
10. घातक कालसर्प दोष
Ghaatak Kaalsarp Yog
जब जातक की कुंडली में राहु-केतु क्रमश: दशवें और चौथे भाव में हों शेष ग्रह इनके मध्य में उपस्थित हों तो वह घातक काल सर्प दोष कहलाता है। इस दोष के कारण माता-पिता की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। यह दोष कंई बार माता पिता से जातक के बिछोह का कारण भी बन जाता है। इसके अलावा इस दोष के कारण जातक के कैरियर में बाधाएं भी उत्पन्न होती हैं।
11. विषधर कालसर्प दोष
Vishdhar Kaal Sarp Dosh
ग्यारहवे भाव में राहु, पांचवें में केतु और बाकी सभी ग्रह इन दोनों के मध्य हों तो विषधर कालसर्प दोष बनता है। इस दोष के कारण उसकी संतान प्रभावित होती है। पीड़ित जातक को अल्प संतान का योग होता है। इस के कारण संतान कमजोर एवं बीमार रहती है। याददाश्त बेहद कमजोर हो जाती है। जातक की शिक्षा भी इस दोष के कारण प्रभावित होती है।
12. शेषनाग कालसर्प दोष
Sheshnag Kaal Sarp Yog
जब कुंडली के बारहवें घर में राहु एवं छठवें घर में केतु हों तथा बाकी के सभी ग्रह इन दोनों के मध्य विराजमान हों तो शेषनाग कालसर्प दोष होता है। इस दोष के कारण शत्रु आम तौर पर हावी हो जाते हैं। पीड़ित जातक को विश्वासघात एवं गुप्त दुश्मन से कष्ट मिलते हैं। ऐसा व्यक्ति हड्डियों की कमजोरी, स्नायु संबंधी और आंखों समस्याओं जूझता रहता है।
अब आप आसानी से कुंडली देखकर इस दोष का पता लगा सकते है, परन्तु यह ध्यान रखें कि यहां इस दोष के विभिन्न प्रकार एवं उनके दोष सभी ज्योतिषाचार्यों द्वारा इसी प्रकार बताए जाते हैं। इसके अलावा भी अनेक ज्योतिषीय परिस्थितियां होती हैं जो कालसर्प योग पर प्रभाव डालती हैं।
इस लिए इस दोष के विषय पर पीड़ित की संपूर्ण कुंडली का विश्लेषण बहुत जरूरी होता है, तभी सही रूप से इस दोष के प्रभाव का पता लगाया जा सकता है। अगर आप ज्योतिष के जानकार नहीं है तो किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अच्छे ज्योतिषाचार्य से विचार विमर्श जरूर करें। आचार्यों द्वारा विश्लेषण करके सभी काल सर्प दोषों का परिहार और प्रभाव कम किया जा सकता है
कालसर्प दोषों का समाधान और उपाय
- नागपंचमी के दिन किए जाने वाले उपाय: नाग-नागिन का जोड़ा चांदी का बनवाकर पूजन करने के उपरांत जल में बहाने से इस दोष का प्रभाव कम हो जाता है। नारियल पर ऐसा ही नाग-नागिन का जोड़ा बनाकर, मौली से लपेटकर जल में बहाएं, या किसी सपेरे से एक नाग का जोड़ा खरीद कर जंगल में छोड़ देने से भी काल सर्प दोष का परिहार होता है।
इसके अतिरिक्त कुछ ऐसे भी उपाय हैं जिनको पूर्ण विधि विधान से करने पर इस दोष का परिहार पूर्ण रूप से हो जाता है जैसे-
- उज्जैन के महाकाल मंदिर एवं नासिक जिले के त्रयम्बकेश्वर मंदिर और सोमनाथ मंदिर में जाकर विधि विधान पूर्वक पूजा पाठ करवाने इस दोष का पूर्ण रूप से परिहार हो जाता है।
- शुभ नक्षत्र एवं शुभ योग में द्वादश ज्योर्तिलिंगों पर रूद्धाभिषेक करने से काल सर्प दोष का सफलतापूर्वक परिहार हो जाता है।
- चांदी से निर्मित सर्प को अगर शुभ काल एवं शुभ समय में भगवान शिव की पूजा अराधना करके नदी में प्रवाहित किया जाए तो इस योग का प्रभाव कम हो जाता है।
- बटुक भैरव की पूजा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप प्रत्येक दिन करने से भी यह दोष प्रभावहीन हो जाता है।
इस योग से प्रभावित व्यक्तियों को हमेशा शिव और नाग देवता का इन मंत्रों से जाप करना चाहिए ऐसा करने से दोष प्रभावहीन हो जाता है
- ।। नागेन्द्रहाराय ॐ नम: शिवाय।।
- ।। ॐ नागदेवतायै नम:।। या नाग पंचमी मंत्र ।।ॐ नाग कुलाय विद्महे विष दन्ताय धीमहि तन्नौ सर्प प्रचोद्यात्।।
निष्कर्ष
Kaal Sarp Dosh व्यक्ति के दैनिक जीवन में अनेक विपत्तियों और बाधाओं को लेकर आता है। यह व्यक्ति के अशांत मन और असफलता का कारण बन सकता है। हालांकि ज्योतिष शास्त्र में इन परिस्थितियों से निपटने के उपाय हैं और ज्योतिष के माध्यम से जीवन को संतुलित करना भी संभव है। ज्योतिषविद् का परामर्श, नियमित रूप से पूजा-पाठ, संध्या उपासना, मंत्रजाप इत्यादि उचित उपाय इस प्रकार के कुंडली दोषों के प्रभावों को कम करने में बहुत कारगर साबित होते हैं।
इसके अतिरिक्त हमारी सकारात्मक सोच, कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास किसी भी प्रकार की बाधा को दूर करने में सबसे बड़ा मंत्र है। अपने जीवन में शांति और सफलता प्राप्त करने के अनुशासन के साथ नियमित ध्यान और योग का अभ्यास जरूर करें, हमेशा सही समय पर उचित निर्णय लें और निरंतर प्रयास करते रहना आपको हमेशा कामयाब करता है।
ये जरूर याद रखें कि किसी भी प्रकार का ज्योतिषीय दोष केवल एक दृष्टिकोण मात्र हैं। ज्योतिषीय प्रेरणा लेकर आप अपने जीवन को सुधार सकते हैं। आपका दृढ़ विश्वास और सही समय पर निर्णय लेने तथा उचित मार्गदर्शन ही आपकी सफलता का वास्तविक राज है।
अस्वीकरण: यह कंटेंट केवल सामान्य जानकारी आपके साथ साझा करता है। किसी भी जानकारी का उपयोग करने से पहले अपने विवेक का उपयोग करें और उसे अन्य स्रोतों के द्वारा कन्फर्म कर लें। यहाँ उपलबध जानकारी के लिए हिन्दुविशेष.कॉम और लेखक पूर्ण सत्यता का दावा नहीं करता है।
NOTE: उचित सलाह के लिए प्रमाणित ज्योतिषविद से संपर्क करें।
स्रोत: लाल किताब, गीता पञ्चाङ्ग, कालसर्प शांति पद्धति
Related Articles:
ज्योतिष शास्त्र कैसे सीखे (Jyotish Shastra Kaise Sikhe): सम्पूर्ण जानकारी
ज्योतिष का महत्व और उपयोग: जानिए Astrology Meaning
Vivah Main Deri: कारण और समाधान | Meri Shadi Kab Hogi? Jaldi Shadi ke Upay.
Manglik Dosh Nivaran: लक्षण, परिहार | Mangal Dosha Remedies
Lagadha Vedanga Jyotisha: Astro वैदिक विज्ञान Jyotish Vedang
Vastu Dosh के कारण आर्थिक तंगी और परिवार में अशांति आती है? Vastu Shastra की विस्तृत जानकारी
Astrology 5000 साल से भी पुराना विज्ञान: ज्योतिष शास्त्र और उसके उपयोग
Also Read:
How to improve Immunity? जान गए तो बिमार होना भूल जाओगे!
Autophagy: अब हमारा शरीर ही खा जाएगा हर बिमारी को!
15 Best Superfoods: इनको डेली खा डाला तो लाइफ झिंगालाला।
Japanese Longevity की सच्चाई: जानिए उनके स्वास्थ्य रहस्य।
भारत में Sexual Violence का बढ़ता संकट: यौन हिंसा देश की एक गंभीर समस्या।









