ज्योतिष शास्त्र एक वैश्विक प्राचीन विद्या है, जो जीवन के प्रत्येक पहलू को समझने का शानदार माध्यम है। इसी शास्त्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है ‘Janam Kundali’, जो किसी जातक के जन्म समय और स्थान के आधार पर ज्योतिषी द्वारा तैयार की जाती है। जन्म कुंडली को जांचना और उसका सटीक विश्लेषण करना सीखना एक ज्योतिषीय कला है, जिसमें अभ्यास, धैर्य और सही दिशा-निर्देशों का पालन करने की जरूरत होती है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम विस्तार से जानेंगे कि ‘कुंडली कैसे देखें’ और इसका सटीकता के साथ विश्लेषण किस प्रकार करें। सबसे पहले कुंडली के बारे में विस्तार से जानना जरूरी है।
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कुंडली क्या है?
Kundali एक ज्योतिषीय चार्ट है, जिसे जन्म पत्रिका या Horoscope भी कहते हैं। यह भारतीय वैदिक ज्योतिष का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह एक खगोलीय चार्ट है जिसका निर्माण व्यक्ति की जन्म तिथि, समय और स्थान के आधार पर किया जाता है। एक कुंडली मुख्य रूप से बारह भावों (घरों) में विभाजित होती है, जिनमें मुख्यत नवग्रह और 12 राशियों का सांकेतिक विवरण लिखा हुआ होता है।
कुंडली का प्रत्येक भाव जातक के जीवन से संबंधित किसी न किसी पहलू को दर्शाता है। जैसे कि जातक का व्यक्तित्व, विवाह, शिक्षा, करियर, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति। इस चार्ट को तैयार करने के लिए पंचांग, ग्रहों की गति, स्थिति और खगोलीय गणनाओं का उपयोग किया जाता है। इसी चार्ट (कुंडली) के आधार पर ज्योतिषी व्यक्ति के जीवन की संभावित घटनाओं और परिस्थितियों का पूर्वानुमान लगाते हैं और जातक को उचित उपाय भी सुझाते हैं।
भारतीय संस्कृति में Janam Kundali का महत्व
भारतीय संस्कृति में कुंडली का बहुत ज्यादा महत्व है, खासकर जातक के विवाह, नौकरी, संतान और स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं को समझने के लिए इसका सहारा लिया जाता है। भारतीय संस्कृति में कुंडली मिलान को विवाह के लिए बहुत आवश्यक माना जाता है, ताकि वर-वधू के ग्रहों की अनुकूलता को सुनिश्चित किया जा सके। वर-वधू के गुण मिलान, मंगल दोष की जानकारी, ग्रहों की दशा और महादशा इत्यादि ज्योतिषीय अवधारणाओं के अध्ययन के बाद उचित निर्णय लिया जा सके।
इसके अलावा, कुंडली के माध्यम से जातक की ग्रह दशाओं और गोचर के प्रभावों का विश्लेषण करके उसके भविष्य की संभावनाओं का भी पता लगाया जाता है। कुछ लोग इसे मात्र एक विश्वास ही मानते हैं, जबकि अन्य का मानना है कि यह एक वैज्ञानिक गणनाओं पर आधारित शास्त्र है। बेसक समय बदल चुका है परन्तु आज के आधुनिक युग में भी, अनेक डिजिटल astrology software और Applications की मदद से कुंडली बनाई जा रही है और उसका विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे ज्योतिष शास्त्र में लोगों की रुचि और विश्वास बढ़ रहा है।
Kundali देखने हेतु मुख्य विचारणीय घटक
1. बारह भाव (घर)- कुंडली में मौजूद प्रत्येक भाव मानवीय जीवन के किसी न किसी क्षेत्र विशेष को दर्शाता है, जैसे कि जातक का व्यक्तित्व, शिक्षा, परिवार, करियर, विवाह-प्रणय, आजीविका, आर्थिक और स्वास्थ्य स्थिति इत्यादि। कुंडली के 12 भावों में से कौन-सा भाव किस मानवीय पहलू के बारे में जानकारी देता है, ये समझने के लिए यहां दिए गए चित्र को समझिए।

2. नवग्रह- सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु के स्वरूप अनुसार जातक के जीवन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जाता है। ग्रहों को क्रमानुसार नीचे बताया जा रहा है, कि कौन से ग्रह से जीवन के किस पहलु को देखा जाता है:

- सूर्य (Sun)- ज्योतिष शास्त्र में सूरज को आत्मा का कारक ग्रह माना गया है। इसके अलावा जातक के पिता, नेतृत्व, मान-सम्मान, सरकारी कार्य के विषय में इस ग्रह के प्रभाव से विचार किया जाता है।
- चन्द्रमा (Moon)- चन्द्रमा को मन का कारक ग्रह माना गया है। इसके अलावा सोम ग्रह से जातक की माता, मानसिक स्थिति, भावनाएँ और रचनात्मकता के बारे में विचार किया जाता है।
- मंगल (Mars)- भौम ग्रह को ऊर्जा का कारक माना गया है। इससे जातक के साहस, भाई-बंधु, भूमि-संपत्ति, युद्ध, दुर्घटनाएँ इत्यादि के बारे में विचार किया जाता है।
- बुध (Mercury)- इसे बुद्धि का प्रतीक ग्रह माना जाता है। इसके अलावा इस ग्रह से व्यापार, संचार, तर्कशक्ति, शिक्षा का विश्लेषण करना चाहिए
- बृहस्पति / गुरु (Jupiter)- इस ग्रह को ज्ञान का कारक कहा गया है। इस से धर्म, गुरु, संतान, भाग्य, संपत्ति आदि के विषय में विचार किया जाता है।
- शुक्र (Venus)- इस ग्रह को प्रेम और प्रणय का सूचक ग्रह कहा गया है। इस से विवाह, सुख-संपत्ति, सौंदर्य, भोग-विलास इत्यादि पर विचार करना चाहिए।
- शनि (Saturn)- इस ग्रह को कर्म और न्याय का कारक माना गया है। इसके अलावा इस ग्रह से व्यक्ति के परिश्रम, विलंब, दुःख, अनुशासन आदि पर विचार किया जाता है।
- राहु (Rahu)- इस ग्रह से छल-कपट, विदेश, टेक्निकल, रहस्य, भ्रम, राजनीति आदि के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है।
- केतु (Ketu)- इस से जातक के मोक्ष, आध्यात्मिकता, शोध, रहस्यवाद, त्याग जैसे विषयों को समझने का प्रयास किया जाता है।
3. उनके प्रकार के अनुसार नवग्रहों के शुभाशुभ प्रभाव-ग्रहों के तीन प्रकार जैसे कि पाप ग्रह, क्रूर ग्रह, मित्र ग्रह माने गए हैं, जिनके अनुसार ग्रहों के प्रभाव की गणना की जाती है। इसी प्रकार ग्रहों की स्थिति और राशियों के साथ संबंधों के अनुसार शुभ या अशुभ फल का विचार किया जाता है। यहां दिए गए चित्रों में ग्रहों के प्रकार, ग्रहों की स्थिति, ग्रहों की उच्च और नीच राशि, स्वराशि, मित्र और शत्रु ग्रह, क्रूर और पाप ग्रह इत्यादि को अच्छे से समझाया गया है।



4. बारह राशियाँ- सभी राशियां जातक के सोचने के तरीके, उसके व्यवहार और जीवन की संभावनाओं को कुंडली के माध्यम से दर्शाती हैं। राशियों को ज्योतिष में दो प्रकार से देखा जाता है। 1. पाश्चात्य ज्योतिष में राशि सौर वर्ष के अनुसार जन्म के मास के आधार पर राशियों को बताया गया है। 2. भारतीय ज्योतिष में चन्द्र मास के हिसाब से राशियों पर विचार किया जाता है। कुंडली में चन्द्रमा जिस राशि में होता है, उसे ही जातक की जन्म राशि कहा जाता है। इसके अलावा व्यक्ति के प्रचलित नाम के पहले अक्षर के हिसाब से भी राशि को चुना जाता है। राशियों के तीन रूप होते हैं, चर राशि, स्थिर राशि, और द्विस्वभाव राशि। राशियों के रूप को समझने के लिए यहां दिए गए चित्र 1 और 2 को देखिए, और डिटेल में जानने के लिए हमारा लेख (ज्योतिष कैसे सीखें) पढ़िए।
5. दशाएँ- जातक की कुंडली का विश्लेषण करते समय तीन मुख्य दशाओं पर विचार किया जाता है, महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतरदशा, इनके माध्यम से पता चलता है कि जातक के जीवन पर वर्तमान में किस ग्रह का प्रभाव चल रहा है। जिस ग्रह की दशा चल रही हो उस ग्रह के स्वरूप और स्वभाव के हिसाब से संभावनाओं का अनुमान लगाया जाता है। महादशा– एक ग्रह का लंबे समय तक प्रभाव (6 से 20 वर्ष तक) अंतर्दशा- महादशा के भीतर एक और सूक्ष्म प्रभाव। प्रत्यंतरदशा- ओर भी छोटे समय अंतराल के प्रभाव का अध्ययन करने करने के लिए इस दशा का अध्ययन किया जाता है।
6. गोचर (ट्रांजिट)- जिस समय जातक की कुंडली देखी जा रही है, उस समय ग्रहों की वर्तमान स्थिति और उनका Kundali पर प्रभाव जानने के लिए देखा जाता है कि कौन-सा ग्रह किस राशि से निकलकर कौनसी राशि में प्रवेश करने जा रहा है या करेगा या किया है। इसके आधार पर संभावनाओं को जानने का प्रयास किया जाता है, कि आने वाला समय कैसा रहेगा। इस साल के ग्रह गोचर की सम्पूर्ण जानकारी आप हमारे इस आर्टिकल (Grahan and Grah Gochar: 2025 की प्रमुख ज्योतिषीय घटनाएं।) में पढ़ सकते हैं।
7. शुभ और अशुभ योग- प्रत्येक कुंडली में ग्रहों की स्थिति और युति के आधार पर शुभ और अशुभ योग बनते हैं जैसे राजयोग, धन योग, कालसर्प योग, पितृदोष योग इत्यादि। ये योग जातक के जीवन को बहुत प्रभावित करते हैं। इन योगों का विश्लेषण जरूर करना चाहिए। इन का जातक के जीवन की सफलताओं और असफलताओं के अध्ययन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान होता है। कुंडली के सभी महत्वपूर्ण योगों की जानकारी के लिए यह आर्टिकल— (20 Famous Kundli ke Yog) पढ़िए।
8. नक्षत्र- भारतीय ज्योतिष में 28 नक्षत्र बताए गए हैं। इन नक्षत्रों का जातक की कुंडली पर विशेष प्रभाव पड़ता है, जोकि जातक के स्वभाव और जीवन की घटनाओं को प्रभावित करते हैं। सभी नक्षत्रों की जानकारी नीचे चित्र में दी गई है।

9. अष्टकवर्ग और शोडशवर्ग- ये दोनों ही भारतीय वैदिक ज्योतिष में कुंडली विश्लेषण के महत्वपूर्ण घटक हैं, जिनका उपयोग जन्म कुंडली के गहन विश्लेषण के लिए किया जाता है।
अष्टकवर्ग- बिंदुओं के आधार पर प्रत्येक राशि को आठ वर्गों में विभाजित करने वाली एक प्रणाली है, जिसमें ग्रहों के द्वारा भिन्न-भिन्न राशियों में प्रदान किए गए बिंदुओं (अंकों) के आधार पर किसी ग्रह की शक्ति और उसके प्रभाव को परखा जाता है। इस से व्यक्ति के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में शुभ-अशुभ प्रभावों का आंकलन किया जाता है।
शोडशवर्ग- ये सोलह प्रकार की विभाजित कुंडलियाँ होती हैं, जोकि जन्म कुंडली का अति सूक्ष्म स्तर पर अध्ययन करने के लिए बनाया जाती हैं। इनमें मुख्य रूप से दशांश, नवांश, द्वादशांश, षष्ठांश आदि प्रमुख वर्ग शामिल होते हैं, जो किसी जातक के जीवन से संबंधित पहलुओं जैसे कि करियर, विवाह, धन, स्वास्थ्य आदि से जुड़े तथ्यों को प्रकट करते हैं। इन दोनों प्रमुख विधियों के उपयोग से ज्योतिषी जातक के जीवन से संबंधित सटीक संभावनाओं को उजागर करने का प्रयास करता है।
10. ग्रहों की युति और दृष्टि- जब एक से अधिक ग्रह एक एक भाव में उपस्थित होते हैं तो इस स्थिति को ग्रह युति कहते हैं, और जब ग्रह अपने स्थान से किसी अन्य भाव पर दृष्टि डालते हैं, इसे उस ग्रह की दृष्टि कहा जाता है। कुंडली में उत्पन्न होने वाली इन ग्रह स्थितियों के व्यक्तियों के जीवन पर शुभ-अशुभ प्रभाव पड़ते हैं। इनके अध्ययन से कुंडली विश्लेषण में सटीक परिणाम को प्राप्त करने में सहायता मिलती है। कुंडली में ग्रह दृष्टि को समझने के लिए यहाँ दिए गए चित्र को देखें।

जन्म कुंडली भविष्य देखना और विश्लेषण का तरीका
पहला तरीका: ज्योतिषी के पास कोई भी व्यक्ति जब अपनी कुंडली लेकर आता है तो उसके मन में किसी न किसी प्रकार की जिज्ञासा या समस्या होती है, जैसे की- बिमारी क्यों ठीक नही हो रही है? विवाह में अड़चन क्यों आ रही है? रोजगार क्यों नहीं चल रहा है? इस प्रकार के बहुत सारे प्रश्न लेकर जातक ज्योतिषविद् के पास आता है, ताकि उसको पता लग सके की कोई कुंडली से संबंधित समस्या तो नही है।
दूसरा तरीका: जब कोई व्यक्ति अपनी कुंडली का संपूर्ण कुंडली विश्लेषण करवाना चाहता है, तो इसमें कुंडली के सभी घटकों और पहलुओं पर विचार किया जाता है।
चलिए उदाहरण के साथ विस्तार से जानिए कि ‘कुंडली कैसे देखें’
कुंडली देखने और बनाने के लिए सबसे पहले ज्योतिषी के पास निम्नलिखित सही जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए- व्यक्ति की सटीक जन्म तिथि (Date of Birth), सटीक जन्म समय (Time of Birth), जन्म स्थान (Place of Birth), इन तीन जानकारियों के साथ कोई भी ज्योतिषी जन्म कुंडली बना सकता है और उसका विश्लेषण कर सकता है। कुंडली बनाने के बाद या कुंडली के उपलब्ध होने के बाद, ऊपर बताए गए सभी घटकों के आधार पर एक-एक करके कुंडली का अध्ययन और विश्लेषण किया जाता है। चलिए इसको एक उदाहरण के साथ समझते हैं।
उदाहरण (Kundali Reading with Examples)- 1 किसी विशेष प्रश्न का जवाब खोजना
जातक एक या कुछ दुविधाओं को अपने मन लेकर किसी ज्योतिषी को कुंडली दिखाने के लिए आता है। मान लीजिए एक व्यक्ति रमेश कुमार अपनी कुंडली दिखाने आया है और उसका प्रश्न है कि वह जानना चाहता है कि उसकी शादी कब होगी? इस पर विचार करने के लिए कुंडली के सातवें भाव पर अधिकतम ध्यान देकर प्रश्न का उत्तर खोजने का प्रयास किया जाता है। मान लीजिए की उस व्यक्ति का जन्म 1 दिसंबर 1995 में रात्रि 11:00 बजे दिल्ली में हुआ है। उसका कुंडली चार्ट इस प्रकार है।

विवाह से संबंधित प्रश्न के अनुसार अगर इस चार्ट को देखा जाए तो जातक के सातवें भाव में कुंभ राशि में शनि ग्रह बैठा हुआ है, जो की एक क्रूर ग्रह है, जो विवाह में देरी करवाता है। जिससे सीधा स्पष्ट होता है की इस जातक का विवाह देरी से होगा। अन्य कारकों में किसी जातक पर कालसर्प दोष भी है, जो इसके विवाह में कुछ बाधा उत्पन्न कर सकता है। इसकी ओर अधिक गहराई तक पहुंचाने के लिए इस जातक पर जो महादशा चल रही है, उसको भी देखना भी बहुत जरूरी होगा। विवाह में हो रही देरी के कारण को समझने के लिए आप हमारा आर्टिकल (विवाह में देरी क्यों) पढ़ सकते हैं।
उदाहरण (Kundali Reading with Examples)– 2 जातक की संपूर्ण कुंडली का विश्लेषण
संपूर्ण जन्मपत्रिका का विश्लेषण करने के लिए सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान दिया जाता है आगे इन्हीं सभी प्रमुख पॉइंट्स पर ध्यान देते हुए हम Janam Kundali का संपूर्ण विश्लेषण करने का तरीका बताएंगे। जिन बिंदुओं पर ध्यान देना है उनकी लिस्ट इस प्रकार है।
1. मूलभूत जानकारी- सबसे पहले जन्मपत्री की सभी मुख्य मूलभूत बातों को नोट किया जाता है जैसे की:
- लग्न (Ascendant)- इसके द्वारा व्यक्ति का व्यक्तित्व और जीवन की मुख्य दिशा इत्यादि की जानकारी प्राप्त की जाती है। जैसे की ऊपर दी गई रमेश कुमार की कुंडली में सिंह लग्न है। सिंह लग्न का स्वामी सूर्य है तो इस जातक के ऊपर सूर्य का प्रभाव रहेगा।
- चंद्र राशि (Moon Sign)- राशि के माध्यम से मानसिक स्थिति और स्वभाव इत्यादि को जानने का प्रयास किया जाता है। रमेश कुमार का चंद्रमा आठवें भाव की मीन राशि में है। अर्थात रमेश कुमार की चन्द्र राशि मीन है,जिसे जन्म राशि भी कहा जाता है। आठवें भाव में चंद्रमा हमेशा अशुभ फल देता है। जातक के मानसिक रूप से बिमार होने का संकेत है।
- सूर्य राशि (Sun Sign)- इस राशि के माध्यम से जातक की आत्मा, अहंकार और जीवन उद्देश्य आदि को समझने का प्रयास किया जाता है। चतुर्थ भाव की वृश्चिक राशि में सूर्य है तो सूर्य राशि वृश्चिक है।
2. नवमांश कुंडली- इस कुंडली के माध्यम से जातक के विवाह, धर्म और भाग्य को गहराई से समझने का प्रयास किया जाता है। नवमांश कुण्डली का अध्ययन करने के लिए ज्योतिष शास्त्र का अनुभव बहुत जरूरी होता है।
3. ग्रहों की राशि और भाव स्थिति- ग्रहों के माध्यम से यह देखा जाता है कि कौन सा ग्रह किस भाव में किस राशि में है और क्या बताने का प्रयास कर रहा है।
- सूर्य: रमेश कुमार का सूर्य (लग्नेश) चतुर्थ भाव में है। चतुर्थ भाव से माता सुख, भवन, मानसिक शांति, छाती और दिल से संबंधित बीमारियों के बारे में, संपत्ति, छलकपट, दयालुता, उदर रोग इत्यादि की जानकारी प्राप्त की जाती है। चतुर्थ भाव में सूर्य उपस्थित है तो ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि- तुरीये दिनेशेऽतिशोभाधिकारी जनः संल्लभेत् विग्रहे बंधुतोऽपि। प्रवासी विपक्षावहे मानभ कदाचिन्न शान्तं भवेत् तस्य चेतः।। अर्थात जिस जातक के लग्न से चौथे भाव में सूर्य स्थित हो तो वह अत्यंत ही शोभा युक्त पद पर बैठता है। उसका संबंधियों से विग्रह रहता है। वह हमेशा प्रदेश में ही निवास करता है, और उसके शत्रु उसको हमेशा पराजित करने का प्रयास करते हैं, और उसका चरित्र आसान रहता है। चतुर्थ भाव में सूर्य की स्थिति वाला जातक केवल धन और मान की प्राप्ति ही करता है। यही उसका शुभ फल होता है। नहीं तो अधिकतर उसको अशुभ फल ही प्राप्त होते हैं। इसी प्रकार अन्य ग्रहों का विश्लेषण किया जाता है।
4. ग्रहों की दृष्टि- ग्रहों की दृष्टि बहुत मायने रखती है इसमें के माध्यम से यह देखा जाता है कि कौन-कौन से ग्रह एक-दूसरे को देख रहे हैं, और क्या प्रभाव डाल रहे हैं। जैसे रमेश कुमार के लग्न भाव पर शनि ग्रह की पूर्ण दृष्टि पड़ रही है। शनि की दृष्टि से सिंह लग्न पर दुष्प्रभाव नजर आ सकते हैं।
5. ग्रहों की युति- एक ही भाव में स्थित ग्रहों का आपसी प्रभाव। उदाहरण के रूप में यहां पर जो रमेश कुमार की कुंडली का विश्लेषण किया जा रहा है, उसमें देखा जाए तो चतुर्थ भाव में बुध सूर्य और शुक्र ग्रह की युति हो रही है। इस प्रकार पंचम भाव में मंगल और शुक्र की युति हो रही है। ग्रहों की युति के अध्ययन से अच्छे और बुरे प्रभावों का विश्लेषण किया जा सकता है।
6. नीच/उच्च ग्रह- ग्रहों की उच्च और निम्न स्थितियों के माध्यम से जाना जाता है कि कौन से ग्रह बलवान या कमजोर हैं। उदाहरण स्वरुप उपर दी गई कुंडली में इस प्रकार की स्थिति नजर नही आ रही है।
7. बारह भावों का अध्ययन- Kundali के प्रत्येक भाव का अपना एक महत्व है। जिनके आधार पर जातक की कुंडली का अध्ययन किया जाता है। इसको समझाने के लिए उपर चित्र के माध्यम से बताने का प्रयास किया गया है। प्रत्येक भाव व्यक्ति के किसी न किसी पहलु की जानकारी देता है, और उस भाव में मौजूद ग्रह और उस पर पडने वाले ग्रहों की दृष्टि और युति भाव से संबंधित सभी पहलुओं को प्रभावित करती है।
जैसे रमेश कुमार की कुंडली में 7वें भाव पर शनि ग्रह मौजूद है, जो उनके दाम्पत्य जीवन और विवाह को प्रभावित करता नजर आ रहा है। इसी प्रकार आठवें भाव में चन्द्रमा का होना अशुभ फल देता हुआ नजर आ रहा है। ऐसे ही सभी ग्रहों का विश्लेषण किया जाता है।
8. ग्रहों की दशा, महादशा और अंतर्दशा- वर्तमान में कौन-से ग्रह की महादशा चल रही है और वह कुंडली में कैसी स्थिति में है। इन दशाओं के विश्लेषण से वर्तमान स्थिति का पता लगाया जा सकता है। जैसे रमेश कुमार की कुंडली में वर्तमान में शुक्र की महादशा चल रही है। शुक्र को प्रेम और प्रणय का ग्रह माना गया है, तो उनकी कुंडली में भरपूर प्रेम नजर आ रहा है। दाम्पत्य जीवन सुखमय बीत रहा है। अगर विवाह नही हुआ है तो विवाह का प्रबल योग बनता नजर आ रहा है। इस प्रकार वर्तमान में चल रही दशा बहुत कुछ बता देती है। इसके अलावा आने वाली दशाओं से भविष्य की संभावनाओं को भी देखा जा सकता है।
9. योग और दोषों का विश्लेषण- कुंडली के विश्लेषण से पता चलता है कि रमेश कुमार की कुंडली में प्रबल कालसर्प दोष है और साथ में ही एक शुभ योग भी बन रहा है जोकि बुध आदित्य योग है, जो उनके जीवन को सुखमय बनाता है। इनके अलावा उनकी कुंडली में और कोई अन्य दोष नहीं है ना ही कोई योग बन रहा है।
10. गोचर का अध्ययन- ग्रहों का एक राशि को छोड़कर दूसरी राशि में प्रवेश करना ग्रह गोचर कहलाता है। इससे वर्तमान समय में हो रही घटनाओं का विश्लेषण किया जाता है, और संभावनाओं की जानकारी जुटाई जाती है। ग्रह गोचर से जातक के वर्तमान राशिफल का पता लगाने में सहायता मिलती है। राशिफल का अनुमान लगाने के लिए मुख्य रूप से शनि, बृहस्पति और राहु-केतु के गोचर का विशेष अध्ययन किया जाता है।
11. कुंडली मिलान- कुंडलियों का मिलान मुख्य रूप से विवाह के समय किया जाता है जिससे व और वधू के भविष्य का अनुमान लगाया जाता है। इसके माध्यम से वर वधु के 36 गुणों का विश्लेषण किया जाता है, और इसमें देखा जाता है कि वर वधु के 36 में से कितने गुण आपस में मिल रहे हैं। जितने अधिक गुण मिलते हैं, उतना ही विवाह के सफल होने की संभावना बनती है।
12. भावों के स्वामी ग्रहों का प्रभाव- जिस भाव में जो राशि होती है उस राशि का स्वामी ही उस भाव का स्वामी माना जाता है अगर उस राशि में कोई भी ग्रह मौजूद नहीं है तो उसमें मौजूद राशि के स्वामी के आधार पर उस भाव का विश्लेषण किया जाता है। जैसे कि ऊपर दी गई रमेश कुमार की कुंडली में लग्न में कोई भी ग्रह स्थित नहीं है परंतु वहां पर पांचवी राशि यानी कि सिंह राशि है जिसका स्वामी सूर्य है अर्थात इस कुंडली में भावेश सूर्य ही रहेगा और उसी के अनुसार उसे भाव का विश्लेषण किया जाएगा।
13. नक्षत्रों का अध्ययन- व्यक्ति की जन्म कुंडली में जन्म के समय जो नक्षत्र होता है, उसे ही जन्म नक्षत्र कहा जाता है, और चंद्रमा जिस नक्षत्र में मौजूद होता है, उस नक्षत्र में जन्म समय के चरण के अनुसार जातक का नाम करण किया जाता है। जैसे की रमेश कुमार की कुंडली में जन्म के समय चंद्रमा उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में है और चौथा चरण चल रहा है, चौथे चरण का अक्षर ‘न’ है तो जातक का जन्म नाम ‘न’ से जैसे की नरेंद्र माना जा सकता है। नक्षत्र का स्वामी शनि है, तो उनके जन्म के समय उन पर शनि की कृपा दृष्टि बनी हुई है जिसका प्रभाव उनके उपर हमेशा रहेगा।
14. विशेष ग्रह स्थिति और उपाय- जब कुंडली में कुछ ग्रह मिलकर विशेष स्थिति पैदा करते हैं तो वह कुंडली को बहुत प्रभावित करती है जैसे रमेश कुमार की कुंडली में राहु और केतु विशेष प्रभाव डालकर कालसर्प दोष का निर्माण कर रहे हैं इस प्रकार चतुर्थ भाव में सूर्य और बुध मिलकर बुध-आदित्य योग बना रहे हैं। इसमें कालसर्प दोष अशुभ है, जबकि बुध आदित्य योग शुभ फल देता है। ज्योतिषी इस प्रकार के अशुभ ग्रहों के प्रभाव को कम करने के लिए कुछ उपाय वगैरा बताते हैं जिनमें कुछ तंत्र-मंत्र और रत्नों इत्यादि का उपयोग किया जाता है।
ऊपर दिए गए सभी पहलुओं के अलावा भी बहुत सारे तथ्यों की जानकारी कुंडली से जुटाने का प्रयास किया जाता है, और संपूर्ण कुंडली का विश्लेषण करने के बाद कुंडली का फल कथन लिखा जाता है। अर्थात विश्लेषण के आधार पर कुंडली के माध्यम से जो जानकारी जुटाई जाती है, उसको लिखा जाता है, और प्रश्नकरता को संपूर्ण जानकारी बताई जाती है।
कुंडली देखने का अभ्यास आपको ज्योतिष शास्त्र में पारंगत बनाएगा
ज्योतिष शास्त्र में Kundali देखना सीखने के लिए लगातार अभ्यास बहुत जरूरी होता है। ‘कुंडली कैसे चेक करें’ या ‘Kundli dekhe free’ जैसे कीवर्ड से Google search engine का उपयोग करके आप सैंकड़ों लोगों की कुंडली देखने का अभ्यास कर सकते हैं। आज के इस डिजिटल युग में, बहुत सारी वेबसाइट्स और ऐप्स उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से आप ‘free Janam Kundali by date of birth and time in Hindi’ में बनाकर देख सकते हैं और अपनी कुंडली विश्लेषण की क्षमता और कला को बढ़ा सकते हैं।
निष्कर्ष
ज्योतिष शास्त्र में Kundli का अध्ययन और अभ्यास का विषय है, जितना आप अभ्यास और अध्ययन करते हैं, उतनी ही आपकी कुंडली विश्लेषण करने की क्षमता बढ़ती जाती है। इस विद्या में ऊपर दिए गए सभी घटकों और पहलुओं पर विचार करते हुए ध्यानपूर्वक की ये गये अध्ययन से सटीक निष्कर्ष निकाला जा सकता है। सटीक विश्लेषण करने के लिए प्रेक्टिस के साथ-साथ ज्ञान और अभ्यास आपको पारंगत बनाता है।
अंत में देखा जाए तो कुंडली का विश्लेषण करना एक गूढ़ विद्या है, जिसके माध्यम से किसी भी व्यक्ति के जीवन की संभावनाओं, चुनौतियों और अवसरों को जानने और समझने का प्रयास सभी महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटकों के अध्ययन के द्वारा किया जाता है। अगर आप ज्योतिष शास्त्र में गहरी रुचि रखते हैं, तो इस विद्या का अध्ययन गहराई से करना सीखें और समाज हित के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए लोगों का जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास करें। अगर इस आर्टिकल से संबंधित कोई सवाल आपके मन में आ रहा है, तो निःसंकोच हमसे पूछें! हम सदैव आपकी सेवा के लिए यहां मौजूद हैं।
स्रोत: jyotish Piyush, jyotish sarva sangrah, Diwakar Panchang, Hindi writing tool (Google input tool)
डिसक्लेमरः यह लेख किसी भी जानकारी, सामग्री, गणितीय सिद्धांत की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी बिल्कुल भी नहीं है। भिन्न-भिन्न ज्योतिषविदों, माध्यमों, पंचांगों, सत्संगों, सामाजिक मान्यताओं, धार्मिक ग्रंथों, सांस्कृतिक विरासत से संग्रहित करने के बाद यह कंटेंट आप तक पहुंचाया गया है। हमारा एक मात्र उद्देश्य है आप तक जानकारी पहुंचाना। यह पूर्ण रूप से उपयोगकर्ता पर निर्भर है कि दी गई इस जानकारी को किस प्रकार उपयोग करता है। हमारी प्रार्थना है कि उपयोगकर्ता इसे केवल जानकारी समझकर ही ग्रहण करें, इसके अलावा, इस जानकारी के किसी भी प्रकार के उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी। यहाँ उपलबध जानकारी के लिए हिन्दुविशेष.कॉम और लेखक पूर्ण सत्यता का दावा नहीं करता है।
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