भारतीय कालविधान शास्त्र में राहु को एक छाया ग्रह का दर्जा दिया गया है। बेसक यह ग्रह ब्रह्मांड में वास्तविक रूप से अस्तित्व में न हो, परन्तु इसकी गिनती प्रभावशाली ग्रहों में की जाती है। ऐसा माना जाता है कि यह किसी भी व्यक्ति के जीवन में गहरे परिवर्तन ला सकता है। जब राहु अष्टम भाव (Rahu in 8th House ) में बैठा होता हो, तो यह जातक के जीवन में रहस्यमयी परिस्थितियाँ उत्पन्न करता है।
यह व्यक्ति की जिंदगी में अचानक उतार-चढ़ाव, रहस्यमयी विद्याओं में रुचि, विरासत, दुर्घटनाएँ, आयु और अध्यात्म से संबंधित विषयों को बहुत प्रभावित करता है। क्या आप जानते हैं कि राहु केतु के कारण ही कुंडली में कालसर्प दोष जैसा बुरा योग भी बनता है, लेकिन यहाँ हम सिर्फ आठवें भाव में राहु के प्रभाव को जानेंगे।
आपको मालूम होगा कि आठवें भाव को ‘मृत्यु भाव’, ‘गुप्त ज्ञान का भाव’ और ‘अचानक से होने वाले परिवर्तनों का घर’ भी कहा जाता है। इस स्थान का राहु व्यक्ति को रहस्यमयी, जिज्ञासु बनाता है और कभी-कभी असामान्य परिस्थितियों से भी रूबरू करवाता है। कदापि यह मानकर नही चलना चाहिए कि स्थिति नकारात्मक और प्रतिकूल ही होंगी। शुभ स्थिति का राहु शुभ फल भी देता है, जैसे कि-
“आठवें भाव का शुभ स्थिति वाला राहु जातक को पुण्यआत्मा के अतुल्य बनता है, ऐसे जातक को मृत्यु के उपरांत निश्चित ही राजकुल में जन्म मिलता है” (ज्योतिष तत्वांक २०१४’ पृष्ठ-२५६)
उचित उपाय और समझदारी से राहु को अनूकूल बनाकर अच्छे परिणाम भी प्राप्त किये जा सकते हैं जैसे कि आध्यात्मिक जागरण, अनुसंधान क्षमता और रहस्यों को जानने की शक्ति प्राप्त करना इत्यादि।
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General Effects of Rahu in 8th House – राहु का अष्टम भाव में प्रभाव
1. अचानक घटनाएँ- यह ग्रह जीवन में अप्रत्याशित सुख-दुःख के आगमन का कारण बनता है, जैसे कि वाहन दुर्घटना, अचानक बिमारी होना, विदेश गमन, अचानक मृत्यु, दबा हुआ धन प्राप्त होना इत्यादि।
2. स्वास्थ्य समस्याएँ- अशुभ स्थिति वाला राहु अनिद्रा, मस्तिष्क संबंधित समस्याएं, पागलपन, गुप्त रोग, पेट से जुड़ी परेशानियाँ, ब्लड प्रेशर जैसी स्वास्थ्य परेशानियों को जन्म देता है।
3. विरासत और संपत्ति- राहु ग्रह अचानक से धन संपत्ति का लाभ या हानि करता है। इसके अलावा इस से पैतृक संपत्ति में विवाद आदि भी सामने आ सकते हैं।
4. रहस्यमयी प्रवृत्ति- आठवें भाव का राहु जातक की गुप्त विद्याओं, ज्योतिष, तंत्र-मंत्र या शोध में रुचि को भी दर्शाता है।
5. वैवाहिक जीवन- कुंडली में अगर यह ग्रह सातवें भाव के साथ संबंध बना रहा है तो विवाह में रुकावटें, या जीवनसाथी के स्वास्थ्य में समस्या भी उत्पन्न कर सकता है।
6. आध्यात्मिक दृष्टिकोण- अगर यह ग्रह धर्म भाव से संबंधित हो तो व्यक्ति मृत्यु, मोक्ष और अध्यात्म के प्रश्नों पर गहन विचार करने वाला होता है।
“राधा कृष्ण श्रीमाली जी अपनी पुस्तक भारतीय ज्योतिष में बताते हैं की आठवें भाव का राहु जातक को गुप्त रोगी, बकबक करने वाला, उदर संबंधी रोगी, पुष्ट देह, अकर्म की लत, मूर्ख और क्रोधी, लांछित, मन का मेला, दुर्जन, परंतु कठिन परिश्रम करने वाला बनाता है।”
लग्नानुसार जानें अष्टम भाव की किस राशि में राहु क्या फल देता है?
मेष लग्न के अंतर्गत आठवें भाव में वृश्चिक राशि के राहु का फल
मेष लग्न के अंतर्गत आठवें भाव में वृश्चिक राशि पड़ती है तो वृश्चिक राशि का राहु जातक के जीवन में अनेक परेशानियां उत्पन्न करता है। अगर पुरातत्व से संबंधित किसी कार्य को कर कर अपना जीवन निर्वाह करता है जातक तो अपने कार्य में कुछ हानि उठानी पड़ेगी, उसके उदर से संबंधित खासकर पेट के निचले हिस्से में कुछ विकार उत्पन्न हो सकते हैं। ऐसा व्यक्ति गहरी चाल चलने वाला कूटनीतिज्ञ पीठ पर गहरा वार करने वाला, बाहुबली बनने वाला होता है। ऐसा जातक घोर संकट सहन करके कामयाबी पाता है।


वृष लग्न के अंतर्गत आठवें भाव में धनु राशि के राहु का फल
जब वृषभ लग्न के अंतर्गत आठवें स्थान में धनु राशि का राहु होता है तो वह जातक अपने जीवन में बड़े-बड़े संकट और आघात बर्दाश्त करता है ऐसे जातक को उधर संबंधी अनेक विकारों का सामना करना पड़ता है अशांति भरा जीवन जीना पड़ता है जीवन के यापन हेतु अपने कार्यों में कई बार हानि उठानी पड़ती है अनुचित कार्यों के द्वारा ऐसा जातक कुछ बड़ी उपलब्धियां प्राप्त करता है चालबाजी से काम लेता है कई बार आत्महत्या के प्रयास करता है और दुखी रहता है।
मिथुन लग्न के अंतर्गत आठवें भाव में मकर राशि के राहु का फल
इस स्थिति में जातक अपने जीवन में कुछ सामान्य परेशानियों का सामना करता है। गूढ़ स्वभाव वाला एक महान व्यक्ति होता है जो जीवन में अनेक बार निराशाओं का सामना करता हुआ और मुसीबतों का झेलते हुआ आगे बढ़ता है। ऐश्वर्या पूर्ण वस्तुओं की प्राप्ति हेतु हमेशा संघर्षशील रहता है। पेट से संबंधित विकार वाला और गुप्त विधाओं की और आकर्षित होने के साथ साथ गहरे व्यक्तित्व वाला होता है।


कर्क लग्नस्थ अष्टम भाव में कुंभ राशि के राहु का फल
कर्क लग्न के चार्ट में आठवें स्थान पर कुंभ राशि का राहु हो, तो ऐसा जातक चतुर, चालबाज, बड़े-बड़े कार्य करने के लिए उत्सुक रहता है। मुस्तैदी के साथ अपने कार्य करता है। गड़े हुए खजाने की तलाश में रहता है। गुप्त खोज करने वाला होता है। स्वास्थ्य के हिसाब से देखें तो उदर संबंधी विकारों से ग्रस्त रहता है। हमेशा चिताओं से घिरा होता है, जिसके कारण कई बार मानसिक परेशानियों का सामना भी करता है। ऐसे जातक को जीवन में बहुत सारी निराशाएं झेलने के बाद ही कोई आशा की किरण नजर आती है।
सिंह लग्न के अंतर्गत आठवें भाव में मीन राशि के राहु का फल
इस स्थिति में जातक अनेक परेशानियों का सामना करता है और अनेक स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां जैसी की पेट के अंदरूनी भाग में कोई विकार इत्यादि झेलता है। बड़ी चालबाजियों के द्वारा वह मनपसंद वस्तु को प्राप्त करता है। कहीं बाहर जानलेवा घटनाओं के कारण मृत्यु तुल्य योग बनते हैं। अंततः अनेक कठिनाइयों का सामना करने और गहरे चिंतन के बाद मन को शांति मिलती है।


कन्या लग्न के अंतर्गत आठवें भाव में मेष राशि के राहु का फल
कुंडली में जब कन्या लग्न का चार्ट बनता है तो उसमें आठवें भाव की मेष राशि का राहु आता है,जो जातक के जीवनकाल में कुछ बहुत बड़ी परेशानियां उत्पन्न करता है, और दुख देता है। यहाँ अशुभ राहु कभी-कभी घोर संकट भी पैदा कर सकता है। ऐसे जातक के पेट में नाभि के जो नीचे वाला हिस्सा होता है वहां विकार उत्पन्न हो सकते हैं, इसके अलावा गुदा द्वार में भी प्रॉब्लम हो सकती है। ऐसा जातक बहुत अधिक मेहनत करने वाला और घमंडी होता है, सोच बड़ी गहरी और गुप्त होती है। अपने परिश्रम के बल पर बहुत अधिक धन कमाने की चाह रखने वाला होता है।
तुला लग्न के अंतर्गत आठवें भाव में वृष राशि के राहु का फल
बर्थचार्ट तुला लग्न का और आठवें भाव में वृष राशि का राहु अशुभ स्थिति का हो तो जातक को जीवन में कुछ असाध्य कर्मों का सामना करना पड़ता है। चिंता पूर्ण जीवन व्यतीत करता है और समय का सदुपयोग नहीं कर पाता है। ऐसा जातक पैतृक संपत्ति में हानि उठाता है, परंतु अपने परिश्रम के बल पर बड़ा नाम कमाता है, और प्रसिद्ध आदमी बनता है। ऐसा जातक जीवन में कई प्रकार के बेचैन करने वाले आघात बर्दाश्त करता है।
अपने जीवन में ऊंचाई तक पहुंचने के लिए अनेक कठिनाइयों का सामना करता है। स्वास्थ्य के लिहाज़ से ऐसा जातक पाचनतंत्र सम्बंधित परेशानियों से हमेशा दो चार होता रहता है, पेट खराब रहता है और कब्जी की समस्या बनी रहती है।


वृश्चिक लग्नस्थ अष्टम भाव में मिथुन राशि के राहु का फल
जिस जातक के कुंडली में मिथुन राशि का राहु होता है तो वह श्रेष्ठता बोध (Superiority complex) की मनोदशा से ग्रसित रहता है, लोगों को अपना रौब दिखाकर उनको प्रभावित या इंप्रेस करने की कोशिश करता है। ऐसा जातक गहरी चाल चलने वाला और बड़ी ही गहरी सोच रखने वाला भी होता है। ऐसा जातक अच्छी तरक्की करता है लेकिन दिखावटी जीवन शैली के कारण अपने आप को औरों से कम महसूस करता है। ऐसा जातक जमीन जायदाद की नपाई बटाई से सम्बंधित कार्यों में बहुत रूचि रखता है।
धनु लग्न के अंतर्गत आठवें भाव में कर्क के राहु का फल
इस प्रकार के बर्थचार्ट में कर्क का राहु जातक को बहुत परेशान करता है, यह पेट और मलद्वार से संबंधित कब्ज़ जैसी अनेक बिमारियों को बढ़ाने वाला होता है। ऐसा जातक संचित की हुई शक्तियों को प्राप्त करता है परंतु वह उनके गलत इस्तेमाल के कारण हानि उठाता है। ऐसा जातक अपने अनिश्चित व्यवहार के कारण संबंधों को खराब कर देता है, और अनेक प्रकार की गुप्त चिंताओं का सामना करता हुआ जीवनयापन करता है। इन के जीवन में विदेश गमन का योग होता है। ऐसे जातक को अपने व्यवहार पर काबू रखने की बहुत जरुरत रहती है।


मकर लग्नानतर्गत मृत्यु स्थान में सिंह राशि के राहु का फल
जिस मनुष्य के मकर लग्न के साथ आठवें भाव में सिंह राशि का राहु होता है, वह अपने दैनिक जीवन में क्लेश का भागी रहता है। वह अपनी उम्र के हिसाब से बड़े-बड़े आघात सहन करता है। ऐसा मनुष्य पेट से संबंधित विकारों का शिकार रहता है। जातक पैतृक धन संपत्ति के लिए संघर्ष करता है। गुप्त चालों का शिकार होता है। विदेश गमन कर सकता है, परंतु क्लेश का सामना करता है। चतुर रणनीति के माध्यम से धन कमाता है।
कुंभ लग्न के अंतर्गत अष्टमभाव में कन्या राशि के राहु का फल
कुंभ लग्न के जातक की कुंडली में आठवें भाव में कन्या राशि का राहु हो तो वह कठिन, लेकिन गौरवपूर्ण जीवन जीते है। स्वाभिमानी होते हैं। चतुर नीति और युक्ति के माध्यम से फायदा उठाते हैं। कामकाज में चतुर और चालबाज होते हैं। अपनी चतुराई से पैतृक संपत्ति को प्राप्त करते हैं। स्वास्थ्य के लिहाज से उदर विकारों से ग्रस्त रहते हैं। इस प्रकार की स्थिति वाला जातक बड़ी-बड़ी बातें करने वाला होता है, जिसका मकसद अपनी बातों के माध्यम से अपना काम निकालना होता है।


मीन लग्न के अंतर्गत अष्टम भाव में कन्या राशि के राहु का फल
कुंडली में इस प्रकार की स्थिति वाला जातक दैनिक जीवन में कुछ परेशानियों को झेलने वाला और संघर्षशील रहने वाला व्यक्ति होता है। ऐसे व्यक्ति से लोगों को खूब शिकायतें रहती हैं। खूब मेहनत और मजदूरी के बाद अच्छे से गुजारा करने वाला होता है। पैतृक संपत्ति की हानि उठाने वाला, कम आयु में गहरे आघात बर्दाश्त करने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति के पास गहरे ज्ञान का भंडार होता है। बातों को गुप्त रखने वाला होता है। ऐसे जातक के जीवन में विदेश जाने के योग बनते हैं, परंतु अनेक प्रकार की अड़चनों को पार करना होता है।
Moon and Rahu Conjunction in 8th House – चंद्रमा-राहु की अष्टम भाव में युति
जब राहु और चंद्रमा अष्टम भाव में युति कर रहे हों, तो इसे चंद्र-ग्रहण योग कहा जाता है। इस प्रकार की ग्रह स्थिति में जातक की मानसिक स्थिति अस्थिर हो सकती है, हालांकि कल्पनाशक्ति प्रबल होकर उभरती है लेकिन नकारात्मक सोच का खतरा बना रहता है। कुल मिलाकर देखा जाए तो चन्द्रमा और राहु का मेल नकारात्मक प्रभाव छोड़ता है, खासकर यह जातक के दैनिक जीवन में मानसिक तनाव और अनिद्रा की संभावना को बढ़ाता है और गुप्त शत्रु या रिश्तों में भ्रम उत्पन्न करता है।
8th house Rahu and Moon Remedies
राहु और चंद्रमा के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए रजत धातु धारण करना सबसे अच्छा और प्रभावी तरीका है। चाँदी की अंगूठी, चेन, कड़ा धारण करें। प्रतिदिन चंद्रमा को अर्घ्य देने से निश्चित लाभ होगा। चन्द्रमा के मंत्र ‘ॐ चंद्राय नमः’ का डेली १०८ बार जप करें। गरीबों और जरूरतमंद लोगों को सफेद कपड़ों और खाद्य पदार्थों जैसे कि दूध और चावल का दान करें।
आठवें भाव राहु और दूसरे स्थान केतु प्रभाव – Rahu in 8th House and Ketu in 2nd House
कुंडली में बनने वाली यह स्थिति व्यक्ति की धन संपत्ति और वाणी को बहुत प्रभावित करती है। व्यक्ति पैसा नहीं जोड़ पाता है, धन संग्रह में कठिनाई रहती है। अक्सर रिश्तों में कटुता उत्पन्न होती है और वाणी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अचानक से धनहानि या लाभ दोनों की संभावना हो सकती है।
आठवें भाव में राहु और दूसरे भाव में केतु का उपाय (Remedies)
इस प्रकार के योग वाले जातक को वाणी की मधुरता बनाए रखनी चाहिए और झूठ से बचने का प्रयास करना चाहिए। गौ सेवा करने से लाभ मिलता है और गरीबों को भोजन दान करना चाहिए। अगर राहु की इस स्थिति का प्रभाव व्यक्ति पर ज्यादा पड़ रहा हो तो रुद्राभिषेक कराना चाहिए।
Rahu in 8th House Marriage Remedies – राहु के वैवाहिक जीवन पर प्रभाव और उपाय
अष्टम भाव में राहु का होना व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में संघर्ष या अनिश्चितता लेकर आ सकता है। इसके कारण विवाह में देरी हो सकती है, अगर विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में दूरी आ सकती है। आपकी कुंडली का राहु जीवनसाथी के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
उपाय- अपने जीवनसाथी के साथ नियमित रूप से मंदिर में जाकर अपने इष्ट भगवान के दर्शन करने चाहिए। हर बुधवार को हरे रंग के वस्त्र पहनें। इसके अलावा मंत्र जाप करें ‘ॐ रां राहवे नमः’। विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए नाग-नागिन के जोड़े की पूजा कराएं।
Lal Kitab Remedies for Rahu in 8th House
लाल किताब जो कि मुख्यतः टोने-टोटकों के लिए जानी जाती है। इस में भी अष्टम भाव में स्थित राहु के दोष दूर करने के लिए कुछ उपाय सुझाए गए हैं जैसे कि
- घर के किसी पवित्र स्थान पर चाँदी का टुकड़ा रखें।
- नारियल और मूँग दान करने से राहु का प्रभाव कम होता है।
- दान करना चाहिए सरसों का तेल शनिवार के दिन।
- घर को साफ-सुथरा और स्वच्छ रखें नकारात्मक ऊर्जा का संचार नही होता है।
राहु के अष्टम भाव दोष के लिए विशेष उपाय | Powerful Remedies for Rahu
- राहु बीज मंत्र का जाप- ‘ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः’ (इस मंत्र का कम से कम 108 बार रोज़ जाप करना चाहिए)
- प्रत्येक शनिवार को डकोत को या शनि मंदिर में जाकर काले तिल और सरसों के तेल का दान करना चाहिए।
- नागपंचमी के दिन विशेष रूप से नाग देवता की पूजा करनी चाहिए। इसके लिए प्रतीकात्मक रूप से तांबे, पीतल या चांदी से निर्मित नाग नागिन का जोड़ा लेना चाहिए।
- काले कुत्ते को रोटी खिलाना बहुत शुभ माना गया है। इसके लिए रोटी को तेल से चुपड़ सकते हैं, या रोटी में थोड़े काले तिल मिला सकते हैं। बहुत कहीं कारगर उपाय है।
- गऊशाला में हरा चारा दान करना चाहिए या स्वयं जाकर गाय को हरी घास खिलानी चाहिए, यह एक समझदारी भरा उपाय है, जो आपको सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।
सकारात्मक पक्ष (Positive Aspects of Rahu in 8th House)
यह कतई भी नहीं मानना चाहिए कि आठवें भाव में राहु हमेशा गलत ही परिणाम देता है बल्कि कई बार ऐसा होता है इस भाव में राहु का होना जातक के जीवन को बदल के रख देता है उसे अनचाही कामयाबी मिलती है। इस ग्रह का एक विशेष गुण यह है कि यह परिणाम अचानक से देता है चाहे वह शुभ परिणाम हो या अशुभ परिणाम हो। आईए जानते हैं कि अष्टम भाव में राहु कौन-कौन से सकारात्मक परिणाम दे सकता है-
- अगर आप साइंस के कार्य में लगे हुए हैं या कोई नई खोज कर रहे हैं तो यह पक्का ही आपके रिसर्च और इनोवेशन में सफलता दिलाता है।
- अगर आप कोई सिद्धि प्राप्त करना चाहते हैं या गुप्त विद्याओं में महारत हासिल करना चाहते हैं तो आठवें भाव का राहु आपके लिए अच्छा है।
- जैसा कि मैंने इस लेख में अनेक स्थानों पर जिक्र किया है कि राहु अचानक से फल देने वाला ग्रह है। यह अगर शुभ स्थिति का हो तो जीवन में कोई बड़ी उपलब्धि अचानक से दे देता है।
- आठवें भाव में राहु का होना जातक के अध्यात्म और मोक्ष की दिशा में प्रगति को प्रबल करता है।
निष्कर्ष- 8th House Rahu शुभ भी, अशुभ भी!
कुंडली विश्लेषण की दृष्टि से देखा जाए तो राहु ग्रह का अष्टम भाव में होना जातक के जीवन को चुनौतीपूर्ण और रहस्यमयी बनाता है। यह कुछ ऐसी परिस्थितियाँ जरूर लाता है, जो व्यक्ति को सामान्य जीवन से हटाकर कठिनाइयो भरे रस्ते की ओर धकेल देती हैं। इसके कारण मनुष्य या तो बिखर जाता है या निखार जाता है।
इस भाव में राहु के शुभाशुभ फल इस बात पर भी निर्भर करते हैं की जातक की जीवनशैली किस प्रकार की है, अगर सही दिशा, धैर्य और उपायों से काम लिया जाए तो यह ग्रह स्थिति जातक को आध्यात्मिक शक्ति, गुप्त ज्ञान और जीवन की गहरी समझ प्रदान कर सकती है, जिससे वह जीवन में भयमुक्त और सुखी जीवन वयतीत कर सकता है।
नोट: राहु को केवल दुःख और भय देने वाला ग्रह नहीं मानना चाहिए। अगर शुभ स्थिति का राहु आपकी कुंडली में है तो यह आपको जीवन की नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने की ताकत भी रखता है। यह अचानक से ऐसे परिणाम देता है जिनकी आपने कल्पना भी नहीं की होती है। अगर अशुभ स्थिति का राहु भी आपकी कुंडली में है तो आपको घबराने की जरुरत नहीं है बल्कि सही मार्गदर्शन और उपाय के माध्यम से इसके दोषों को दूर किया जा सकता है।
इस विषय या अन्य किसी विषय पर आप कुछ जानना चाहते हैं या अपने विचार हमारे साथ साझा करना चाहते हैं तो आप निसंकोच हमसे संपर्क कर सकते हैं।
FAQs
Rahu in 8th house marriage remedies क्या हैं?
अगर आठवें भाव में राहु के कारण विवाह में बाधाएं आ रही हैं तो नियमित रूप से राहु के मंत्र का जाप करना है, नागपञ्चमी के दिन नाग-नागिन पूजा कराएं, और जीवनसाथी या होने वाले साथी के साथ धार्मिक कार्यों में भागीदार बनें।
आठवें घर में राहु हो तो क्या होता है?
आठवें घर का राहु जातक के जीवन को रहस्यमयी और चुनौतीपूर्ण बनाता है। जीवन में अचानक शुभ और अशुभ घटनाएं घट जाती हैं।
कुंडली में 8 घर किसका होता है?
कुंडली का आठवां भाव आयु , मृत्यु, अचानक होने वाली घटनाओं, गुप्त ज्ञान, गुप्त विद्या के विश्लेषण का स्थान माना जाता है।
राहु कौन से भाव में शुभ फल देता है?
राहु सबसे शुभ प्रभाव (फल) ३ , ६ , ११ , भाव में देता है। यह हमेशा अन्य ग्रहों के प्रभाव के अनुरूप अपना प्रभाव दिखाता है, अगर यह शुभ ग्रहो से प्रभावित हो तो शुभ फल देता है। अगर क्रूर,अशुभ या पाप ग्रहों के प्रभाव में हो तो बुरा परिणाम देखने को मिलता है।
Moon and Rahu in 8th house remedies क्या हैं?
अगर आठवें भाव में चन्द्रमा और राहु हों, तो चन्द्रमा को बली करना चाहिए, इसके लिए सफेद वस्तुएं जैसे की दूध, चावल, आटा, दान करना चाहिए, नित्य चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए और चाँदी धातु को गले या हाथ में धारण करना चाहिए।
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- 📘 ज्योतिष पीयूष -पंडित कल्याण दत्त शर्मा
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